दशाश्वमेध घाट भारत के सबसे पवित्र और जीवंत घाटों में से एक है। यह घाट गंगा तट पर स्थित है और यहाँ होने वाली गंगा आरती को पूरी दुनिया में सबसे प्रसिद्ध माना जाता है। हर शाम हजारों श्रद्धालु और पर्यटक इस आरती को देखने के लिए एकत्र होते हैं। यह केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि आस्था, अनुशासन और आध्यात्मिक ऊर्जा का अद्भुत अनुभव है।
दशाश्वमेध घाट, काशी की उस आत्मा का प्रतिनिधित्व करता है जहाँ जीवन, मृत्यु और मोक्ष — तीनों एक साथ अनुभव किए जा सकते हैं।
दशाश्वमेध घाट कहाँ स्थित है
दशाश्वमेध घाट उत्तर प्रदेश के पवित्र नगर वाराणसी में स्थित है।
यह काशी विश्वनाथ मंदिर से कुछ ही दूरी पर, गंगा नदी के मुख्य तट पर स्थित है। इसी कारण यह घाट श्रद्धालुओं के लिए अत्यंत सुलभ और महत्वपूर्ण माना जाता है।
दशाश्वमेध घाट का नाम कैसे पड़ा
धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान ब्रह्मा ने यहाँ दस अश्वों (घोड़ों) का मेध यज्ञ किया था।
“दश” यानी दस और “अश्वमेध” यानी घोड़े का यज्ञ — इसी से इस घाट का नाम दशाश्वमेध घाट पड़ा।
यह कथा इस घाट की प्राचीनता और वैदिक परंपरा से जुड़े होने का प्रमाण मानी जाती है।
दशाश्वमेध घाट की गंगा आरती क्या है
दशाश्वमेध घाट की गंगा आरती हर दिन सूर्यास्त के समय होती है। यह आरती माँ गंगा को समर्पित होती है और वैदिक मंत्रों, शंखनाद, घंटियों और अग्नि के साथ की जाती है।
इस आरती की विशेषता यह है कि
- एक साथ कई पुजारी आरती करते हैं
- प्रत्येक क्रिया ताल और अनुशासन में होती है
- दीप, धूप और अग्नि के माध्यम से माँ गंगा की पूजा की जाती है
आरती के समय पूरा घाट एक आध्यात्मिक मंच में परिवर्तित हो जाता है।
दशाश्वमेध घाट की गंगा आरती कैसे होती है
आरती की शुरुआत वैदिक मंत्रोच्चार से होती है। इसके बाद
- शंखनाद
- दीप प्रज्वलन
- धूप और अग्नि से आरती
- माँ गंगा को पुष्प अर्पण
किया जाता है। आरती के अंत में श्रद्धालु गंगा में दीपदान करते हैं, जिसे अत्यंत पुण्यदायक माना जाता है।
यह पूरी प्रक्रिया लगभग 45 मिनट तक चलती है।
दशाश्वमेध घाट की गंगा आरती का धार्मिक महत्व
धार्मिक मान्यता है कि
- इस आरती को देखने मात्र से मन शांत होता है
- माँ गंगा की कृपा प्राप्त होती है
- पापों का शमन होता है
- जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है
कई श्रद्धालु मानते हैं कि दशाश्वमेध घाट की गंगा आरती आत्मा को मोक्ष की ओर प्रेरित करती है।
गंगा आरती देखने का सबसे अच्छा तरीका
दशाश्वमेध घाट की गंगा आरती दो तरीकों से देखी जा सकती है
- घाट की सीढ़ियों पर बैठकर
- गंगा में नाव से
नाव से आरती देखने पर पूरा दृश्य और अधिक दिव्य और भव्य दिखाई देता है, हालांकि इसके लिए पहले से व्यवस्था करनी होती है।
दशाश्वमेध घाट कब जाएं
गंगा आरती प्रतिदिन होती है, लेकिन
- कार्तिक मास
- देव दीपावली
- महाशिवरात्रि
- सावन माह
में इसकी भव्यता कई गुना बढ़ जाती है।
निष्कर्ष
दशाश्वमेध घाट केवल वाराणसी का एक घाट नहीं, बल्कि भारत की आध्यात्मिक चेतना का प्रतीक है। यहाँ की गंगा आरती आस्था, अनुशासन और दिव्यता का ऐसा संगम है, जिसे शब्दों में पूरी तरह व्यक्त करना कठिन है।
जो भी व्यक्ति एक बार दशाश्वमेध घाट की गंगा आरती देख लेता है, उसके मन पर यह अनुभव जीवन भर के लिए अंकित हो जाता है।

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