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चौघड़िया मुहूर्त क्या है? जानिए शुभ–अशुभ चौघड़िया का महत्व और उपयोग

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चौघड़िया मुहूर्त का उपयोग किसी भी नए कार्य की शुरुआत के लिए शुभ समय जानने हेतु किया जाता है। परंपरागत रूप से इसका प्रयोग यात्रा के लिए किया जाता रहा है, लेकिन इसकी सरलता और उपयोगिता के कारण आज इसका उपयोग अन्य शुभ कार्यों के लिए भी व्यापक रूप से किया जाता है।


शुभ और अशुभ चौघड़िया कौन-से होते हैं

किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत के लिए चार चौघड़िया उत्तम माने गए हैं—

  • अमृत
  • शुभ
  • लाभ
  • चर

जबकि निम्न तीन चौघड़ियाओं को अशुभ माना जाता है—

  • रोग
  • काल
  • उद्वेग

अशुभ चौघड़िया के दौरान मांगलिक कार्यों से बचना चाहिए।


दिन और रात का चौघड़िया क्या होता है

  • दिन का चौघड़िया – सूर्योदय से सूर्यास्त तक
  • रात्रि का चौघड़िया – सूर्यास्त से अगले दिन सूर्योदय तक

दिन और रात दोनों समय में 8-8 चौघड़िया होते हैं।


वार वेला, काल वेला और काल रात्रि का महत्व

मान्यता है कि निम्न समयों में कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए—

  • वार वेला
  • काल वेला
  • काल रात्रि

वार वेला और काल वेला दिन में आते हैं, जबकि काल रात्रि रात के समय होती है। इन समयों में किए गए कार्यों से मनचाहा फल नहीं मिलता।


चौघड़िया नाम कैसे पड़ा

हिंदू धर्म में दिन और रात को कुल 30-30 घटी में बाँटा गया है।
इन्हीं 30 घटी को जब 8 भागों में विभाजित किया गया, तो प्रत्येक भाग लगभग 4 घटी का बना।

इसी कारण इसे कहा गया—

चौघड़िया = चौ (चार) + घटी

चौघड़िया मुहूर्त को चतुर्श्तिका मुहूर्त भी कहा जाता है।


यदि शुभ चौघड़िया और राहुकाल साथ हों तो क्या करें

यह संभव है कि कोई शुभ चौघड़िया राहुकाल के साथ ओवरलैप हो जाए।
राहुकाल को अनिष्टकारी माना जाता है, इसलिए—

➡️ जिस शुभ चौघड़िया का समय राहुकाल से टकराता हो, उसे त्याग देना बेहतर होता है।


यदि शुभ चौघड़िया वार वेला या काल वेला से टकराए तो

यदि कोई शुभ चौघड़िया—

  • वार वेला
  • काल वेला
  • काल रात्रि

के साथ आता है, तो उस समय भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए।
मान्यता है कि इन कालों में किया गया कोई भी मांगलिक कार्य फलदायी नहीं होता।


शुभ और अशुभ चौघड़िया कैसे पहचाने जाते हैं

प्रत्येक दिन का पहला चौघड़िया उस दिन के ग्रह स्वामी द्वारा शासित होता है।

उदाहरण:

  • रविवार → सूर्य
  • सोमवार → चंद्रमा
  • मंगलवार → मंगल
  • बुधवार → बुध
  • गुरुवार → बृहस्पति
  • शुक्रवार → शुक्र
  • शनिवार → शनि

वैदिक ज्योतिष के अनुसार—

  • शुभ ग्रह: शुक्र, बुध, चंद्रमा, बृहस्पति
  • अशुभ ग्रह: सूर्य, मंगल, शनि

इसी आधार पर चौघड़िया को शुभ या अशुभ माना जाता है।


अलग-अलग चौघड़िया का अर्थ और उपयोग

🔸 उद्वेग चौघड़िया

सूर्य द्वारा शासित। सामान्यतः अशुभ माना जाता है।
➡️ सरकारी और प्रशासनिक कार्यों के लिए उपयुक्त।


🔸 चर चौघड़िया

शुक्र द्वारा शासित। शुभ माना जाता है।
➡️ यात्रा और गतिशील कार्यों के लिए सर्वोत्तम।


🔸 लाभ चौघड़िया

बुध द्वारा शासित। शुभ माना जाता है।
➡️ शिक्षा, अध्ययन और नया कौशल सीखने के लिए उपयुक्त।


🔸 अमृत चौघड़िया

चंद्रमा द्वारा शासित। अत्यंत शुभ।
➡️ सभी प्रकार के कार्यों के लिए उत्तम।


🔸 काल चौघड़िया

शनि द्वारा शासित। अशुभ माना जाता है।
➡️ धन अर्जन और मेहनत वाले कार्यों के लिए उपयुक्त।


🔸 शुभ चौघड़िया

बृहस्पति द्वारा शासित। अत्यंत शुभ।
➡️ विवाह और धार्मिक अनुष्ठानों के लिए श्रेष्ठ।


🔸 रोग चौघड़िया

मंगल द्वारा शासित। अशुभ माना जाता है।
➡️ युद्ध, प्रतिस्पर्धा और शत्रु पर विजय हेतु उपयुक्त।


निष्कर्ष

चौघड़िया मुहूर्त जीवन के महत्वपूर्ण कार्यों को सही समय पर करने का मार्गदर्शन देता है। यदि शुभ चौघड़िया, राहुकाल और वेला का सही ध्यान रखा जाए, तो कार्यों में सफलता की संभावना बढ़ जाती है।

सही समय पर किया गया कार्य ही शुभ फल देता है।

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