उज्जैन सिंहस्थ का ग्रीन मेगा प्लान
ग्रीन सिंहस्थ: धार्मिक नगरी उज्जैन में सिंहस्थ 2028 की भव्य तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। इस बार प्रशासन का ध्यान केवल व्यवस्थाओं पर ही नहीं है। इस बार प्रकृति और पर्यावरण को बचाने के लिए भी बड़ा कदम उठाया जा रहा है। सिंहस्थ को देश का पहला ‘ग्रीन सिंहस्थ’ बनाया जाएगा। इसके लिए वन विभाग ने एक बहुत बड़ा और अनोखा मास्टर प्लान तैयार किया है। इस प्लान से पूरी उज्जैन नगरी हरियाली से सज जाएगी।

114 किलोमीटर का बनेगा कॉरिडोर
ग्रीन सिंहस्थ: वन विभाग ने सिंहस्थ क्षेत्र को जोड़ने वाले सभी मुख्य मार्गों की पहचान कर ली है। इन सभी रास्तों को आपस में जोड़ा जाएगा। शहर में करीब 114 किलोमीटर लंबा एक विशाल ग्रीन कॉरिडोर विकसित किया जा रहा है। यह कॉरिडोर यात्रियों को एक सुखद अहसास कराएगा। धार्मिक यात्रा पर आने वाले श्रद्धालुओं को चारों तरफ केवल खूबसूरत और शुद्ध वातावरण मिलेगा। इससे रास्तों की सुंदरता भी काफी ज्यादा बढ़ जाएगी।
10 लाख पौधे लगाने का महा-लक्ष्य
इस बड़े प्रोजेक्ट को पूरा करने के लिए बड़े पैमाने पर पौधारोपण किया जाएगा। वन विभाग ने 10 लाख पौधे लगाने का लक्ष्य रखा है। यह अभियान केवल कागजों या दिखावे तक ही सीमित बिल्कुल नहीं रहने वाला है। पौधों के चयन से लेकर उनकी सुरक्षा की पूरी प्लानिंग तैयार है। यहां केवल वही पौधे रोपे जाएंगे जो स्थानीय मौसम के अनुकूल हों। लंबे समय तक जीवित रहने वाले छायादार पेड़ों को प्राथमिकता दी जाएगी।

जियो टैगिंग से होगी हर पेड़ की सुरक्षा
ग्रीन सिंहस्थ: इस पूरे पौधारोपण अभियान की सबसे आधुनिक और बड़ी खासियत इसकी जियो टैगिंग तकनीक है। सभी पौधों को डिजिटल मैप से जोड़ा जाएगा। स्मार्ट तकनीक की मदद से हर पौधे की सटीक लोकेशन को रिकॉर्ड किया जाएगा। इससे किस इलाके में कितने पेड़ जीवित हैं, पता चल सकेगा। डिजिटल रिकॉर्ड होने से लापरवाही की गुंजाइश भी पूरी तरह से खत्म हो जाएगी। अधिकारियों की जवाबदेही तय होने से पौधों का संरक्षण आसान होगा।
पर्यावरण को प्रदूषण से बचाना है जरूरी
ग्रीन सिंहस्थ: सिंहस्थ दुनिया का बहुत बड़ा मेला है जिसमें देश-विदेश से करोड़ों श्रद्धालु आते हैं। इतनी बड़ी भीड़ से पर्यावरण पर काफी दबाव बढ़ता है। वाहनों के धुएं और धूल के कारण वायु प्रदूषण का खतरा भी काफी बढ़ जाता है। इसी समस्या को रोकने के लिए यह ग्रीन कॉरिडोर संजीवनी बनेगा। प्रशासन चाहता है कि इस पावन पर्व से पूरी दुनिया में प्रकृति संरक्षण का संदेश जाए। आस्था और पर्यावरण की यह जुगलबंदी वाकई बहुत अनूठी होगी।

हमेशा के लिए सुधरेगा शहर का मौसम
विशेषज्ञों के अनुसार इतने बड़े पैमाने पर पेड़ लगाने से शहर का तापमान नियंत्रित रहेगा। आने वाले समय में भीषण गर्मी से भी राहत मिलेगी। यह कॉरिडोर केवल सिंहस्थ मेले तक ही सीमित लाभ देने के लिए नहीं बन रहा है। मेले के बाद भी यह घनी हरियाली उज्जैन की हवा को शुद्ध रखेगी। इसका सीधा और बड़ा फायदा हमेशा के लिए उज्जैन के स्थानीय निवासियों को मिलता रहेगा। शहर का ग्राउंड वाटर लेवल भी इससे काफी हद तक सुधरेगा।
जीवित रहने की दर बढ़ाना ही मुख्य मकसद
ग्रीन सिंहस्थ: वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने इस ग्रीन प्रोजेक्ट पर अपनी बात रखी है। उन्होंने कहा कि उनका मकसद केवल पौधे लगाना नहीं है। उनका असली फोकस लगाए गए पौधों को जीवित रखकर उन्हें बड़ा पेड़ बनाने पर है। इसके लिए खाद और पानी की नियमित व्यवस्था की जा रही है। सिंहस्थ 2028 के शुरू होने से पहले यह कॉरिडोर पूरी तरह तैयार हो जाएगा। महाकाल की नगरी अब एक नए और सुंदर हरित अवतार में नजर आएगी।
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