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नासिक कुंभ मेला (महाराष्ट्र): कब होता है, कैसे होता है और इसका धार्मिक महत्व

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नासिक कुंभ मेला भारत के चार प्रमुख कुंभ मेलों में से एक है। यह महाराष्ट्र में गोदावरी नदी के तट पर आयोजित होता है, जिसे दक्षिण भारत की गंगा कहा जाता है। नासिक कुंभ का विशेष महत्व इसलिए भी है क्योंकि यह वैष्णव और शैव परंपराओं के संतुलन का प्रतीक माना जाता है।

यह कुंभ केवल स्नान का आयोजन नहीं, बल्कि भक्ति, साधना और आत्मशुद्धि का पर्व है, जहाँ साधु-संतों और श्रद्धालुओं का विशाल समागम होता है।


नासिक कुंभ मेला क्या है

नासिक कुंभ मेला उस स्थान पर आयोजित होता है जहाँ गोदावरी नदी प्रवाहित होती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार समुद्र मंथन के दौरान अमृत कलश की एक बूंद नासिक में गिरी थी। इसी कारण गोदावरी तट पर कुंभ मेले की परंपरा विकसित हुई।

नासिक कुंभ का एक प्रमुख केंद्र त्र्यंबकेश्वर भी है, जहाँ भगवान शिव का प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग स्थित है। इस कारण नासिक कुंभ का महत्व और भी बढ़ जाता है।


नासिक कुंभ कब होता है

नासिक में कुंभ मेला तब आयोजित होता है जब
बृहस्पति ग्रह सिंह राशि में और सूर्य भी सिंह राशि में स्थित होता है।

यह विशेष ज्योतिषीय संयोग लगभग हर 12 वर्ष में बनता है। इसी आधार पर नासिक में कुंभ मेले का आयोजन किया जाता है।


नासिक कुंभ कैसे होता है

नासिक कुंभ का मुख्य आयोजन गोदावरी नदी में पवित्र स्नान है। कुंभ के दौरान नासिक और त्र्यंबकेश्वर क्षेत्र में विशाल मेला क्षेत्र बसाया जाता है।

नासिक कुंभ के प्रमुख आयोजन होते हैं

  • गोदावरी नदी में पर्व स्नान
  • अखाड़ों का शाही स्नान
  • साधु-संतों की पेशवाई
  • त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग दर्शन
  • धार्मिक प्रवचन और अनुष्ठान

कुंभ काल के दौरान लाखों श्रद्धालु इन आयोजनों में भाग लेते हैं।


गोदावरी स्नान और शाही स्नान का महत्व

नासिक कुंभ में गोदावरी नदी स्नान का विशेष महत्व माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि कुंभ काल में गोदावरी के जल में स्नान करने से मन की नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और जीवन में शुद्धता आती है।

शाही स्नान नासिक कुंभ का सबसे महत्वपूर्ण आयोजन होता है, जिसमें अखाड़ों के साधु-संत पारंपरिक विधि से स्नान करते हैं। इसके बाद सामान्य श्रद्धालुओं को स्नान का अवसर दिया जाता है।


नासिक कुंभ की धार्मिक मान्यता

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार नासिक कुंभ में

  • गोदावरी स्नान से पापों का नाश होता है
  • मन, शरीर और आत्मा शुद्ध होती है
  • भक्ति और संयम के मार्ग पर आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलती है

नासिक कुंभ को जीवन में संतुलन और साधना का पर्व माना जाता है।


आख़िरी बार नासिक कुंभ कब हुआ

नासिक में
2015 में कुंभ मेला आयोजित हुआ था। इस कुंभ में देशभर से श्रद्धालु और अखाड़े शामिल हुए थे और यह आयोजन सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।


अगला नासिक कुंभ कब होगा

नासिक में
2027 में अगला कुंभ मेला आयोजित होने की परंपरा है। इसे लेकर आने वाले वर्षों में प्रशासनिक और धार्मिक स्तर पर तैयारियां शुरू की जाएंगी।


निष्कर्ष

नासिक कुंभ मेला सनातन परंपरा का वह स्वरूप है जहाँ भक्ति, वैष्णव साधना और शिव उपासना एक साथ दिखाई देती है। गोदावरी के तट पर किया गया स्नान और त्र्यंबकेश्वर दर्शन श्रद्धालुओं के जीवन में शांति और संतुलन लाता है।

नासिक कुंभ केवल एक मेला नहीं, बल्कि आत्मिक शुद्धि और साधना की यात्रा है।

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