उज्जैन सिंहस्थ 2028: उज्जैन एक बार फिर विश्व के बड़े समागम की मेजबानी करेगा। सिंहस्थ कुंभ 2028 की तैयारियां अभी से शुरू हो गई हैं। प्रशासन इस बार श्रद्धालुओं की सुख-सुविधाओं पर खास ध्यान देगा। 2028 का सिंहस्थ भीषण गर्मी के महीनों में आयोजित होगा।
चिलचिलाती धूप को देखते हुए प्रशासन ने बड़ा फैसला लिया है। पूरे मेला क्षेत्र को अब ग्रीन जोन में बदला जाएगा। इसके लिए उज्जैन में 15 लाख पौधे लगाए जाएंगे। यह महाअभियान पर्यावरण को बचाने के लिए शुरू हो रहा है। श्रद्धालुओं को गर्मी से बचाने के लिए यह कदम उठाया जा रहा है।

बनाया जाएगा ग्रीन होल्डिंग स्पेस
उज्जैन सिंहस्थ 2028: सिंहस्थ के दौरान लाखों की संख्या में श्रद्धालु शिप्रा तट पर पहुंचते हैं। गर्मी के प्रकोप से उन्हें राहत देने के लिए प्रशासन ‘ग्रीन होल्डिंग स्पेस’ विकसित कर रहा है। ये ऐसे स्थान होंगे जहां घने पेड़ों की छांव में भक्त आराम कर सकेंगे।
नीम, कदम्ब और पलाश के लगाए जाएंगे पेड़
उज्जैन सिंहस्थ 2028: प्रशासन ने ऐसे पेड़ों का चयन किया है जो तेजी से बढ़ते हैं और जिनका छत्र (Canopy) बड़ा होता है।
- नीम (Neem): यह न केवल छाया देता है बल्कि हवा को भी शुद्ध करता है।
- कदम्ब (Kadam): अपनी घनी पत्तियों के कारण यह गहरी छाया देता है।
- पलाश (Palash): यह क्षेत्र की मिट्टी के अनुकूल है और तेजी से फैलता है।
पंचकोशी यात्रा के लिए तैयारी पूरी
उज्जैन सिंहस्थ 2028: उज्जैन की प्रसिद्ध पंचकोशी यात्रा (Panchkoshi Yatra) लगभग 118 किलोमीटर लंबी है। इस यात्रा के दौरान श्रद्धालु पैदल चलते हैं, जिससे गर्मी के दिनों में उनकी थकान और स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं बढ़ जाती हैं।
उज्जैन डीएफओ (DFO) अनुराग तिवारी के अनुसार, इस पूरे 118 किमी के मार्ग को वृक्षारोपण योजना के अंतर्गत कवर किया जा रहा है। योजना को तीन चरणों में बांटा गया है।
- साल 2026: बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण (8 से 9 फीट ऊंचे पौधों का रोपण)।
- साल 2027: पौधों का रखरखाव और सिंचाई।
- साल 2028: सिंहस्थ के समय तक पूर्ण विकसित ‘ग्रीन कवर’ तैयार करना।
समय से पहले तैयार होगी छांव
उज्जैन सिंहस्थ 2028: उज्जैन कलेक्टर रोशन कुमार सिंह ने स्पष्ट किया है कि इस बार छोटे पौधों के बजाय 8 से 9 फीट ऊंचे पौधों को प्राथमिकता दी जा रही है। इसका कारण यह है कि सिंहस्थ शुरू होने में केवल दो साल का समय बचा है। बड़े पौधे जल्दी लग जाते हैं और दो साल के भीतर एक अच्छी छांव देने लायक छतरी (Canopy) विकसित कर लेते हैं। इन पौधों को वन विभाग की नर्सरी से विशेष रूप से मंगाया जा रहा है।
पौधों की खासियत
- कुल लक्ष्य: 15 लाख पौधे।
- समय सीमा: 3 साल का प्रोजेक्ट (2026-2028)।
- प्रजातियां: नीम, कदम्ब, पलाश और अन्य छायादार वृक्ष।
- तकनीक: प्राकृतिक कूलिंग के लिए ‘ग्रीन पॉकेट्स’ का निर्माण।
नेचुरल कूलिंग करेगा ये ग्रीन होल्डिंग स्पेस
बढ़ते ग्लोबल वार्मिंग और हर साल बढ़ते पारे को देखते हुए यह ‘नेचुरल कूलिंग’ (Natural Cooling) तकनीक बहुत कारगर साबित होगी। कंक्रीट के जंगलों के बीच ये छोटे-छोटे ‘ग्रीन पैच’ न केवल तापमान को 3-4 डिग्री तक कम करेंगे, बल्कि शिप्रा नदी के आसपास के ईको-सिस्टम को भी मजबूत बनाएंगे। प्रशासन इन पौधों की जियो-टैगिंग (Geo-tagging) भी कर सकता है ताकि उनके विकास की निगरानी की जा सके।
श्रद्धालुओं की सुविधा
प्रशासन चाहता है कि भक्त बिना किसी कष्ट के दर्शन करें। भीषण धूप में पैदल चलना किसी चुनौती से कम नहीं। इसलिए ‘ग्रीन पॉकेट्स’ का निर्माण बहुत जरूरी हो गया है। शिप्रा नदी के किनारों पर भी सघन वन विकसित होंगे। इससे नदी का जलस्तर और हरियाली दोनों बेहतर होंगे। उज्जैन अब एक नए और हरित अवतार में दिखेगा। यह सिंहस्थ न केवल आध्यात्मिक बल्कि पर्यावरण अनुकूल भी होगा।
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