गणेश मंदिर: गणेश चतुर्थी का त्योहार आते ही पूरे देश में बप्पा के जयकारे गूंजने लगते हैं। भक्त अपने प्रथम पूज्य देव की भक्ति में पूरी तरह लीन हो जाते हैं। तो ऐसे में क्या आप जानते हैं कि हमारे देश में गणेश जी के कुछ ऐसे मंदिर हैं जहां जाने मात्र से ही सारे विघ्न दूर हो जाते हैं?
सदियों से इन मंदिरों में अलौकिक चमत्कार देखने को मिलते रहे हैं। अगर आप भी इस बार बप्पा की विशेष कृपा पाना चाहते हैं, तो भारत के इन प्रसिद्ध गणेश मंदिरों के बारे में जरूर जानें।
मध्यप्रदेश के गणेश मंदिर से लेकर राजस्थान तक फैले इन मंदिरों का इतिहास बहुत अनोखा है। इन धामों में बप्पा के अलग-अलग और दिव्य रूपों की पूजा की जाती है। आइए जानें देश के इन सभी प्रसिद्ध गणेश मंदिरों के बारे में।
/sootr/media/post_attachments/ibnkhabar/uploads/2023/01/Khajrana-Ganesh-Mandir-indore-16733256093x2-138977.jpg)
खजराना गणेश मंदिर, इंदौर
गणेश मंदिर: मध्य प्रदेश के इंदौर का खजराना गणेश मंदिर देश के सबसे प्रसिद्ध मंदिरों में से एक है। इस मंदिर का निर्माण साल 1735 में महारानी अहिल्याबाई होल्कर ने करवाया था।
मान्यता है कि यहां स्थित गणेश प्रतिमा को औरंगजेब से बचाने के लिए कुएं में छिपाया गया था। पंडित मंगल भट्ट को सपने में प्रतिमा का स्थान दिखा था। इसके बाद रानी अहिल्याबाई ने कुएं से प्रतिमा निकालकर मंदिर स्थापित करवाया।
यहां उल्टे साथिया यानी स्वस्तिक बनाने से हर मन्नत पूरी होती है। मन्नत पूरी होने पर भक्तों को दोबारा आकर सीधा साथिया बनाना होता है। यहां गणेश चतुर्थी पर 10 दिनों का बहुत बड़ा मेला लगता है।
/sootr/media/post_attachments/images/newimg/02092025/Chintaman%20Ganesh%20Temple%20(1)-970946.jpg)
चिंतामन गणेश मंदिर, उज्जैन
गणेश मंदिर: मध्य प्रदेश के उज्जैन में क्षिप्रा नदी के पास चिंतामन गणेश का ऐतिहासिक मंदिर स्थित है। इस मंदिर की स्थापना से जुड़ी कहानी रामायण काल से जुड़ी हुई है। माना जाता है कि भगवान राम, लक्ष्मण और सीता जी ने यहां पूजा की थी।
मंदिर में स्थापित प्रतिमाएं स्वयं प्रकट हुई मानी जाती हैं। यहां तीन गणेश प्रतिमाएं एक साथ विराजित हैं। इन्हें चिंतामन, इच्छामन और कार्यसिद्धी गणेश कहा जाता है।
चिंतामन गणेश भक्तों की सभी चिंताओं को पल भर में दूर कर देते हैं। इच्छामन गणेश भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी करते हैं। कार्यसिद्धी गणेश हर काम को बिना किसी विघ्न के सफल बनाते हैं। गणेश चतुर्थी पर यहां देश भर से लाखों श्रद्धालु दर्शन करने आते हैं।
दंतेवाड़ा ढोलकल गणेश, दंतेवाड़ा
गणेश मंदिर: छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले में बैलाडीला की पहाड़ियों पर ढोलकल गणेश विराजमान हैं। यह मंदिर समुद्र तल से करीब 3000 फीट की ऊंचाई पर स्थित है। यहां 11वीं शताब्दी की विशाल ग्रेनाइट पत्थर की गणेश प्रतिमा स्थापित है।
माना जाता है कि इस प्रतिमा को नागवंश के राजाओं ने स्थापित करवाया था। पौराणिक कथा के मुताबिक, इसी पहाड़ी पर भगवान परशुराम और गणेश जी का युद्ध हुआ था।
युद्ध के दौरान ही गणेश जी का एक दांत टूट गया था। इसी कारण भगवान गणेश को एकदंत के नाम से जाना जाने लगा। यहां तक पहुंचने के लिए भक्तों को घने जंगलों से होकर जाना पड़ता है।
बड़े गणपति मंदिर, राजनांदगांव
गणेश मंदिर: छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव में स्थित बड़े गणपति मंदिर की बहुत बड़ी मान्यता है। इस मंदिर में स्थापित प्रतिमा का आकार काफी विशाल और आकर्षक है।
यह मंदिर शहर के सबसे पुराने और पवित्र धार्मिक स्थलों में गिना जाता है। स्थानीय लोग किसी भी शुभ काम से पहले यहां आकर माथा टेकते हैं। माना जाता है कि यहां सच्चे दिल से मांगी गई हर प्रार्थना बप्पा सुनते हैं।
गणेश चतुर्थी पर यहां भव्य पूजा और श्रृंगार का आयोजन होता है। दसों दिन मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं का भारी जमावड़ा लगा रहता है। इस मंदिर में बप्पा का दर्शन करने से घर में शांति आती है।
/sootr/media/post_attachments/web2images/521/2019/09/03/0521_ranbhanbhor_ganesh_ji_cover-490010.jpg)
त्रिनेत्र गणेश मंदिर, रणथंभौर
गणेश मंदिर: राजस्थान के सवाई माधोपुर में ऐतिहासिक रणथंभौर किले में यह मंदिर स्थित है। यह दुनिया का एकमात्र ऐसा मंदिर है जहां बप्पा अपने पूरे परिवार के साथ विराजे हैं। यहां गणेश जी की तीन आंखों वाली यानी त्रिनेत्र प्रतिमा स्थापित है।
साथ में उनकी पत्नियां रिद्धि-सिद्धि और दोनों पुत्र शुभ-लाभ भी विराजमान हैं। साल 1301 में राजा हम्मीर के शासनकाल में इस मंदिर का निर्माण हुआ था।
माना जाता है कि संकट के समय बप्पा ने राजा को सपने में दर्शन दिए थे। देशभर से लोग अपने घर के शादी का पहला निमंत्रण पत्र इसी मंदिर में भेजते हैं। डाकिया रोज यहां हजारों की संख्या में चिट्ठियां लेकर पहुंचता है।
/sootr/media/post_attachments/etvbharat/prod-images/20-08-2025/rj-jpr-05-ganeshji-photo-7201174_20082025201418_2008f_1755701058_76-453018.jpg)
मोती डूंगरी गणेश मंदिर, जयपुर
राजस्थान के जयपुर शहर के दिल में बसा मोती डूंगरी गणेश मंदिर काफी प्रसिद्ध है। इस मंदिर का निर्माण 1761 में सेठ जयराम पालीवाल ने करवाया था।
मंदिर में स्थापित गणेश जी की प्रतिमा बहुत ही अलौकिक और प्राचीन है। यह प्रतिमा मावली से जयपुर लाई गई थी। इस मंदिर में विराजित गणेश जी की सूंड बाईं तरफ मुड़ी हुई है।
बाईं सूंड वाले गणेश जी को बेहद शांत और फलदायी माना जाता है। जयपुर के लोग नई गाड़ी खरीदने पर सबसे पहले यहीं पूजा कराने आते हैं। गणेश चतुर्थी पर यहां लाखों भक्तों की भीड़ उमड़ती है।
/sootr/media/post_attachments/media/Er3Ogl7U0AIln-2-323104.jpg)
सिद्धिविनायक मंदिर, मुंबई
महाराष्ट्र के मुंबई का सिद्धिविनायक मंदिर भारत का सबसे प्रसिद्ध गणेश धाम माना जाता है। इस मंदिर का निर्माण 1801 में लक्ष्मण विठू और देउबाई पाटिल ने कराया था।
यहां स्थापित प्रतिमा की सूंड दाईं तरफ मुड़ी हुई है। दाईं सूंड वाले गणपति बहुत ही जागृत और सिद्ध माने जाते हैं। माना जाता है कि यहां आने वाला कोई भी भक्त खाली हाथ वापस नहीं जाता।
देश के बड़े नेता, उद्योगपति और बॉलीवुड सितारे भी यहां माथा टेकते हैं। मंदिर के गर्भगृह की छत को सोने की परत से सजाया गया है। गणेश चतुर्थी पर यहां का नजारा देखने लायक होता है।
/sootr/media/post_attachments/site/wp-content/uploads/2022/07/Dagdusheth-Halwai-ganapati-959459.jpeg)
श्रीमन दगडूशेठ हलवाई मंदिर, पुणे
महाराष्ट्र के पुणे का श्रीमन दगडूशेठ हलवाई मंदिर अपनी भव्यता के लिए पूरी दुनिया में जाना जाता है। इस मंदिर की स्थापना 1893 में दगडूशेठ हलवाई ने की थी।
जब उनके बेटे की महामारी से मौत हो गई, तब उन्होंने यह मंदिर बनवाया। लोकमान्य तिलक ने इसी मंदिर से सार्वजनिक गणेशोत्सव की शुरुआत की थी। मंदिर में स्थापित बप्पा की प्रतिमा को बेहद कीमती आभूषणों से सजाया जाता है।
प्रतिमा पर किलो सोना और हीरे जड़े हुए हैं। यह मंदिर अपनी उत्कृष्ट सेवा और सामाजिक कार्यों के लिए भी जाना जाता है। यहां गणेशोत्सव के दौरान दिव्य उत्सव देखने को मिलता है।
डिस्क्लेमर: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी पूरी तरह से सही या सटीक होने का हम कोई दावा नहीं करते हैं। ज्यादा और सही डिटेल्स के लिए, हमेशा उस फील्ड के एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें।
ये खबरें भी पढ़ें…
अनंत चतुर्दशी पर ही क्यों होता है गणेश विसर्जन, जानें पौराणिक महत्व
/sootr/media/post_attachments/images/newimg/02092022/ganesha(1)-998044.jpg)
/sootr/media/post_attachments/onecms/images/uploaded-images/2023/09/20/723a1dbcba3ea6f9f7056086827c1d5e1695196412980369_original-680509.jpg?impolicy=abp_cdn&imwidth=640)

