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उज्जैन का स्वाद: पोहा-जलेबी से दाल-बाफला तक, जानिए क्या खाएं महाकाल नगरी में

उज्जैन का स्वाद
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उज्जैन का स्वाद: महाकाल की नगरी उज्जैन केवल धार्मिक आस्था और मंदिरों के लिए ही प्रसिद्ध नहीं है। यह शहर अपने अनूठे और लजीज मालवी खान-पान के लिए भी जाना जाता है। यदि आप पवित्र शिप्रा नदी के दर्शन कर चुके हैं तो आपकी यात्रा अधूरी मानी जाएगी। जब तक आप उज्जैन की गलियों में मिलने वाले स्वादिष्ट पकवानों का आनंद नहीं ले लेते।

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यहां का खान-पान आपकी धार्मिक यात्रा में एक अलग ही रंग भर देता है। सुबह के हल्के नाश्ते से लेकर रात के मीठे तक हर चीज का अपना खास स्वाद है। मालवा का यह पारंपरिक भोजन न केवल स्वादिष्ट है बल्कि यह पचने में भी बहुत आसान होता है। आइए जानते हैं कि शिप्रा दर्शन के बाद आपको उज्जैन में कौन से व्यंजन जरूर खाने चाहिए।

सुबह की शुरुआत पोहा और जलेबी से

उज्जैन का स्वाद: उज्जैन में दिन की शुरुआत कड़ाई से निकली कड़क जलेबी और पोहे से होती है। यहां के पोहे में बारीक रतलामी सेव और अनार के दाने मिलाए जाते हैं। ऊपर से नींबू निचोड़ने पर इसका स्वाद और भी चटपटा हो जाता है। इसके साथ मिलने वाली रसीली और कड़क जलेबी दिन बना देती है। स्थानीय लोग और श्रद्धालु सुबह सबसे पहले इसी नाश्ते की दुकान पर पहुंचते हैं।

दोपहर में लें शुद्ध देसी दाल-बाफला

उज्जैन का स्वाद: दोपहर के खाने में मालवा की सबसे प्रसिद्ध थाली दाल-बाफला है। गेहूं के आटे की गोलियों को उबालकर उबलते घी में सेका जाता है। यह बाहर से कुरकुरी और अंदर से बिल्कुल नरम होती है। इसे मसालेदार तुअर दाल, लहसुन की चटनी और लड्डू के साथ परोसा जाता है। एक बार इसे खाने के बाद आपका मन बार-बार खाने को कहेगा।

मालवा की खास डिश भुट्टे का कीस

उज्जैन का स्वाद: यदि आप शाम को कुछ अलग और चटपटा नाश्ता करना चाहते हैं। तो उज्जैन के प्रसिद्ध भुट्टे का कीस को जरूर ट्राई करें। ताजे भुट्टे को कद्दूकस करके दूध, घी और मसालों में पकाया जाता है। यह डिश खाने में बहुत ही क्रीमी और हल्की तीखी होती है। शिप्रा तट के पास टहलते हुए इसका स्वाद लेना एक बेहतरीन अनुभव है।

मिठास से भरपूर मालवी रबड़ी और मालपुआ

शिप्रा नदी की संध्या आरती देखने के बाद मीठा खाना तो बनता है। उज्जैन में कढ़ाई में घंटों उबाले गए गाढ़े दूध की रबड़ी मिलती है। गर्म-गर्म मालपुए के ऊपर ठंडी रबड़ी डालकर परोसी जाती है। इसका स्वाद इतना समृद्ध होता है कि मुंह में घुल जाता है। रात के समय मंदिर के आसपास की दुकानों पर भारी भीड़ रहती है।

डिस्क्लेमर: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी पूरी तरह से सही या सटीक होने का हम कोई दावा नहीं करते हैं। ज्यादा और सही डिटेल्स के लिए, हमेशा उस फील्ड के एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें।

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