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मई के अंत में क्यों आता है नौतपा? जानिए कर्क रेखा का पूरा कनेक्शन

नौतपा
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नौतपा: उत्तर भारत में रहने वाले लोगों के लिए बहुत बड़ी खबर सामने आई है। इस साल 25 मई से लेकर 2 जून तक नौतपा रहने वाला है। यह समय पूरी गर्मियों का सबसे गर्म और थका देने वाला होता है।

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नौतपा शब्द का मतलब ही होता है नौ दिनों की सबसे तेज तपिश। इन नौ दिनों में सूरज आग के गोले की तरह चमकता हुआ दिखाई देता है। दिन के समय शहरों की सड़कें किसी भट्टी की तरह तपने लगती हैं।

रात के समय भी लोगों को तेज उमस के कारण चैन की नींद नहीं आती। मौसम विभाग ने भी इन दिनों के लिए भारी हीटवेव का अलर्ट जारी किया है। चलिए जानें कि इस भयंकर गर्मी के पीछे की असली वजह क्या है।

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नौतपा के पीछे क्या है वैज्ञानिक कारण

नौतपा: नौतपा के होने के पीछे एक बहुत ही दिलचस्प और बड़ा वैज्ञानिक कारण छुपा है। हमारी पृथ्वी अपने अक्ष पर लगभग 23.5 डिग्री झुकी हुई घूमती है।

मई के आखिरी हफ्ते में सूर्य की स्थिति बिल्कुल बदल जाती है। इस समय सूरज की सीधी किरणें कर्क रेखा के बिल्कुल ठीक ऊपर पड़ती हैं। भारत का मैदानी इलाका इसी कर्क रेखा के बहुत पास स्थित है।

इस कारण हमारे यहां सूरज की रोशनी सबसे ज्यादा ताकत से पहुंचती है। इन दिनों में दिन का समय भी साल में सबसे बड़ा हो जाता है। सुबह बहुत जल्दी सूरज उग जाता है और शाम को देर से ढलता है। इस वजह से हमारी धरती पूरे दिन बहुत भारी मात्रा में गर्मी सोखती है और गर्मी का कहर देखने को मिलता है।

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सूखी मिट्टी और गर्म हवाएं बढ़ाती हैं आफत

नौतपा: लगातार तेज धूप पड़ने से जमीन के अंदर की सारी नमी खत्म हो जाती है। सूखी मिट्टी बहुत जल्दी गर्म होती है और रात में जल्दी ठंडी भी नहीं होती। यही वजह है कि रात (एमपी नौतपा) का तापमान भी 35 डिग्री तक बना रहता है। इसी दौरान राजस्थान के रेगिस्तान की तरफ से बहुत सूखी और गर्म हवाएं चलती हैं।

इन गर्म हवाओं को ही हमारे यहां आम भाषा में लू कहा जाता है। ये हवाएं उत्तर भारत के मैदानी इलाकों को पूरी तरह तपा देती हैं। ऊंचे वायुमंडल में हवा का दबाव नीचे की तरफ बना रहता है। इस वजह से आसमान में बादल नहीं बन पाते और बारिश की उम्मीद खत्म हो जाती है। चारों तरफ सिर्फ सूखी और झुलसाने वाली गर्मी का माहौल रहता है।

नौतपा में क्यों बढ़ जाती है इतनी उमस

नौतपा के दिनों में सिर्फ सूखी गर्मी ही नहीं बल्कि चिपचिपी उमस भी परेशान करती है। दरअसल इसी समय देश में मानसून के आने की तैयारी भी शुरू हो चुकी होती है।

बंगाल की खाड़ी से नमी वाली हवाएं आगे बढ़ने लगती हैं। इन हवाओं में पानी की भाप की मात्रा बहुत ज्यादा पाई जाती है। हवा में नमी बढ़ने के कारण हमारे शरीर का पसीना जल्दी सूख नहीं पाता है।

वैज्ञानिक भाषा में इस पूरे असर को हीट इंडेक्स कहा जाता है। अगर बाहर का तापमान 45 डिग्री है और हवा में उमस 60 प्रतिशत है। ऐसी स्थिति में हमारे शरीर को 50 डिग्री से ज्यादा की गर्मी महसूस होती है। इस मौसम में लोगों को बहुत ज्यादा थकान और कमजोरी महसूस होने लगती है।

लू के थपेड़ों से खुद को कैसे बचाएं

25 मई से नौतपा के दौरान खुद को सुरक्षित रखना सबसे ज्यादा जरूरी काम होता है। दोपहर को 12 बजे से लेकर शाम 4 बजे तक बाहर जाने से बचें। अगर बाहर जाना बहुत जरूरी हो तो अपना सिर जरूर ढक कर निकलें।

घर से बाहर निकलते समय हमेशा सूती और हल्के रंग के ढीले कपड़े पहनें। अपने पास पानी की बोतल हमेशा रखें और थोड़ी-थोड़ी देर में पानी पीते रहें।

घर में बच्चों और बुजुर्गों की सेहत का इस समय खास ख्याल रखें। शरीर में पानी की कमी न हो इसके लिए नींबू पानी या ओआरएस का घोल पिएं। नौतपा प्रकृति का एक ऐसा चक्र है जिसके खत्म होते ही राहत मिलती है। इसके तुरंत बाद केरल के रास्ते देश में मानसून की एंट्री होती है।

FAQ

Q.

नौतपा क्या होता है और इसके पीछे का असली वैज्ञानिक कारण क्या है?

A.

नौतपा संस्कृत के दो शब्दों ‘नव’ और ‘तप’ से मिलकर बना है, जिसका सीधा अर्थ नौ दिनों की भारी तपिश होता है। इसके पीछे का वैज्ञानिक कारण यह है कि मई के अंत में पृथ्वी के झुकाव की वजह से सूरज कर्क रेखा (Tropic of Cancer) के बिल्कुल ऊपर आ जाता है। इस कारण उत्तर भारत के मैदानी इलाकों पर सूरज की किरणें एकदम सीधी और सबसे ज्यादा तीव्रता के साथ पड़ती हैं। इन दिनों में दिन बहुत बड़े होते हैं जिससे धरती दिनभर भारी मात्रा में हीट सोखती है और रात में भी ठंडी नहीं हो पाती।

Q.

नौतपा के दिनों में तापमान के साथ-साथ इतनी ज्यादा उमस क्यों बढ़ जाती है?

A.

नौतपा के दौरान देश में दक्षिण-पश्चिम मानसून के आने की प्रक्रिया शुरू होने लगती है। इस वजह से बंगाल की खाड़ी और अरब सागर से आने वाली नमी से भरी हवाएं मैदानी इलाकों की तरफ बढ़ने लगती हैं। इन हवाओं में जलवाष्प (पानी की भाप) बहुत अधिक होती है। जब अत्यधिक तापमान और भारी उमस एक साथ मिलते हैं, तो पसीना नहीं सूखता और वातावरण में ‘हीट इंडेक्स’ बढ़ जाता है। इसी कारण लोगों को सामान्य से कहीं ज्यादा चिपचिपी गर्मी महसूस होती है।

Q.

इस साल नौतपा कब से शुरू हो रहा है और इस दौरान लू से बचने के क्या उपाय हैं?

A.

इस साल नौतपा 25 मई से शुरू होकर 2 जून तक चलने वाला है। इन नौ दिनों में भीषण लू और हीटस्ट्रोक से बचने के लिए दोपहर 12 बजे से शाम 4 बजे के बीच घर से बाहर निकलने से बचना चाहिए। शरीर को हमेशा हाइड्रेटेड रखने के लिए दिनभर भरपूर पानी, ओआरएस (ORS) का घोल, छाछ या नींबू पानी पीते रहना चाहिए। बाहर जाते समय हल्के रंग के ढीले सूती कपड़े पहनें, आंखों पर धूप का चश्मा लगाएं और सिर को हमेशा गीले कपड़े या टोपी से ढक कर रखें।

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