उज्जैन सिंहस्थ 2028: उज्जैन में होने वाले सिंहस्थ 2028 को लेकर मध्य प्रदेश सरकार अभी से पूरी तरह से एक्शन मोड में नजर आ रही है। महाकाल की नगरी में देश-विदेश से आने वाले करोड़ों श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए प्रशासन ने मजबूत ब्लूप्रिंट तैयार किया है।
इस बार का सिंहस्थ इसलिए भी ऐतिहासिक है क्योंकि ये पूरे दो महीने यानी 60 दिनों तक चलने वाला है। इस बार का सिंहस्थ डिजिटल युग का सबसे भव्य और अनूठा धार्मिक समागम साबित होने वाला है। देश-दुनिया के करोड़ों श्रद्धालुओं, नागा साधुओं और विभिन्न अखाड़ों के संतों का स्वागत करने के लिए सरकार ने अभी से अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं।
वहीं सिंहस्थ महाकुंभ की शुरुआती टाइमलाइन भी आ चुकी है। आइए जानते हैं इस बार महाकाल की नगरी में क्या कुछ नया होने वाला है। साथ ही प्रशासन इस मेले को सफल बनाने के लिए किस स्तर पर काम कर रहा है।

कब से कब तक चलेगा सिंहस्थ 2028 मेला
उज्जैन सिंहस्थ 2028: इस बार का महाकुंभ पिछले सभी आयोजनों के रिकॉर्ड तोड़कर कई मायनों में बेहद खास और ऐतिहासिक बनने जा रहा है। सरकार इस आयोजन को वैश्विक स्तर पर एक नई पहचान देने के लिए बड़े पैमाने पर इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास कर रही है। ऐसे में शिप्रा नदी के तट पर साल 2028 में आयोजित होने वाले सिंहस्थ महाकुंभ की शुरुआती तारीखों का एलान हो चुका है।
ये पूरे 60 दिनों तक चलेगा। आमतौर पर यह मेला केवल एक महीने के लिए आयोजित किया जाता था। इस बार इसकी शुरुआत 27 मार्च 2028 से होगी और इसका समापन 27 मई 2028 को होगा। दो महीने तक शिप्रा नदी के घाट देश-विदेश के साधु-संतों और श्रद्धालुओं से गुलजार रहेंगे।

कितने श्रद्धालुओं के आने की उम्मीद है
उज्जैन सिंहस्थ 2028: सिंहस्थ महाकुंभ के दौरान पवित्र शिप्रा नदी में डुबकी लगाने का विशेष महत्व होता है। साल 2028 के इस मेले में कुल 3 अमृत स्नान आयोजित किए जाएंगे। ये सभी अमृत स्नान 9 अप्रैल से 8 मई के बीच संपन्न होंगे।
इसके अलावा भक्तों के लिए 7 अन्य प्रमुख स्नान पर्वों का आयोजन भी किया जाएगा। सरकार ने इस बार सिंहस्थ में आने वाली भीड़ का एक बड़ा अनुमान लगाया है। माना जा रहा है कि इस महाकुंभ में देश और दुनिया से लगभग 14 करोड़ श्रद्धालु पहुंच सकते हैं।

महाकुंभ के लिए सरकार का क्या बजट है
उज्जैन सिंहस्थ 2028: इस भव्य आयोजन को सफल बनाने के लिए सरकार ने अभी से कमर कस ली है। सिंहस्थ की व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने के लिए 11 अलग-अलग विभागों ने मिलकर एक बड़ा प्लान तैयार किया है। इसके तहत कुल 15 हजार 751 करोड़ रुपए की लागत से 102 बड़े विकास कार्य करने का प्रस्ताव रखा गया है।
भारी भीड़ और गाड़ियों के दबाव को संभालने के लिए शहर के बुनियादी ढांचे को मजबूत किया जाएगा। प्रशासन उज्जैन की आंतरिक सड़कों को चौड़ा करने की योजना पर काम कर रहा है। इसके साथ ही शिप्रा नदी के घाटों की लंबाई बढ़ाई जाएगी, ताकि लोग आसानी से स्नान कर सकें।
उज्जैन सिंहस्थ 2028 की तैयारियां
देश का पहला जीरो वेस्ट कुंभ:
मुख्यमंत्री मोहन यादव के नेतृत्व में उज्जैन (अवंतिका नगरी) को देश का पहला जीरो वेस्ट कुंभ बनाने का संकल्प लिया गया है। इस पूरे महापर्व को ऐतिहासिक और भव्य रूप देने के लिए सरकार करीब 20 हजार करोड़ रुपए का भारी-भरकम बजट खर्च करने जा रही है।
30 करोड़ श्रद्धालुओं का अनुमान:
इस बार सिंहस्थ में देश-विदेश से लगभग 30 करोड़ श्रद्धालुओं के आने का बड़ा अनुमान लगाया गया है। इस भारी भीड़ और ट्रैफिक को आसान बनाने के लिए शिप्रा नदी के तटों पर 778 करोड़ की लागत से 29 नए घाट और पूरे शहर में 19 नए ब्रिज और आरओबी बनाए जाएंगे।
सिक्स लेन कनेक्टिविटी:
यातायात को सुगम बनाने के लिए इंदौर-उज्जैन रोड को अब फोर लेन से अपग्रेड करके सिक्स लेन में बदला जा रहा है। इसके साथ ही एक नई 48 किलोमीटर लंबी ग्रीन फील्ड सड़क का निर्माण भी किया जा रहा है ताकि बाहरी ट्रैफिक को शहर के अंदर आने से रोका जा सके।
5003 करोड़ की मेडिसिटी:
श्रद्धालुओं की स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए चिकित्सा क्षेत्र में ऐतिहासिक कदम उठाए जा रहे हैं। उज्जैन में 5003 करोड़ रुपए की लागत से एक विशाल अल्ट्रा-मॉडर्न मेडिसिटी बनाई जाएगी। इसके अलावा, मेला क्षेत्र को 6 हेल्थ जोन में बांटकर वहां 500 अस्थाई अस्पताल और स्वास्थ्य कैंप लगाए जाएंगे, जहां 24 घंटे एम्बुलेंस, ब्लड बैंक और ट्रॉमा सेंटर की सुविधाएं मिलेंगी।
ऑल-इन-वन मोबाइल ऐप:
ये पूरा आयोजन पूरी तरह से हाई-टेक और डिजिटल तकनीक पर आधारित होगा। इसके लिए एक ऑल-इन-वन मोबाइल ऐप विकसित किया जा रहा है। इसमें श्रद्धालुओं को पार्किंग, ट्रैफिक, ड्रोन सर्विस और फेस रिकग्नीशन आधारित सुरक्षा अलर्ट की लाइव जानकारी मिलेगी। इसके जरिए लोग घर बैठे मेले का वर्चुअल टूर भी कर सकेंगे।
सांस्कृतिक विरासतों का विकास:
धार्मिक महत्व के साथ उज्जैन की ऐतिहासिक धरोहरों को भी संवारा जा रहा है। शहर के ऐतिहासिक कोठी पैलेस भवन को अब वीर भारत संग्रहालय के रूप में विकसित किया जाएगा। इसके साथ ही, वीर दुर्गादास की छत्री पर 52 करोड़ रुपए की लागत से भव्य प्रवेश द्वार, पार्किंग और उनकी भव्य मूर्ति स्थापित की जाएगी।
स्मार्ट डिजास्टर मैनेजमेंट:
मेला क्षेत्र में किसी भी प्रकार की अनहोनी या आपदा प्रबंधन से निपटने के लिए एडवांस पाइपलाइन और विशेष फायर फाइटर तैनात किए जाएंगे। आपातकालीन स्थिति में सुरक्षा और राहत एजेंसियों का रिस्पांस टाइम मात्र 15 मिनट तय किया गया है, ताकि तुरंत मदद पहुंचाई जा सके।
उज्जैन सिंहस्थ में काशी का क्राउड मैनेजमेंट मॉडल
होल्डिंग एरिया और जिग-जैक लाइन:
महाकाल मंदिर और मुख्य मेला क्षेत्रों में भीड़ के सीधे दबाव को रोकने के लिए विशेष होल्डिंग एरिया और एडजस्टेबल जिग-जैक लाइनें बनाई जाएंगी, जिन्हें भीड़ के अनुसार छोटा या बड़ा किया जा सकेगा।
स्मार्ट हेड काउंट कैमरे:
सिंहस्थ के प्रमुख प्रवेश द्वारों और शिप्रा नदी के घाटों पर हाई-टेक हेड काउंट कैमरे लगाए जाएंगे। ये कैमरे हर घंटे श्रद्धालुओं की लाइव मॉनिटरिंग करेंगे, जिससे भीड़ का सटीक अंदाजा मिलेगा।
अलग-अलग एंट्री और एग्जिट पॉइंट:
आम श्रद्धालुओं और वीआईपी मेहमानों के लिए अलग-अलग रास्ते होंगे। आम जनता के लिए चारों दिशाओं में कई एंट्री-एग्जिट पॉइंट होंगे ताकि कहीं भी जाम या भगदड़ की स्थिति न बने।
गर्भगृह और झांकी दर्शन व्यवस्था:
महाकाल मंदिर में अत्यधिक भीड़ होने पर ‘बाहर से झांकी दर्शन’ की व्यवस्था लागू होगी। कैमरों से भीड़ कम होने का सिग्नल मिलने पर ही श्रद्धालुओं को गर्भगृह के पास जाने की अनुमति दी जाएगी।
प्रशिक्षित स्टाफ और हेल्प डेस्क:
मेला क्षेत्र के हर ज़ोन में एक समय पर सैकड़ों सुरक्षाकर्मी और मददगार तैनात रहेंगे। ये कर्मचारी ‘हेल्प डेस्क’ के जरिए बुजुर्गों और दिव्यांगों को सही रास्ता दिखाकर पैनिक रोकेंगे।
लगातार अनाउंसमेंट और व्यवहार नियंत्रण:
पूरे सिंहस्थ क्षेत्र में पब्लिक एड्रेस सिस्टम से लगातार सही गाइडलाइन दी जाएगी ताकि अफवाहें न फैलें। साथ ही, ड्यूटी पर तैनात स्टाफ को श्रद्धालुओं से विनम्रता और धैर्य से पेश आने की विशेष ट्रेनिंग दी जाएगी।
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