सिंहस्थ 2028 की मान्यता उज्जैन में होने वाला एक बड़ा धार्मिक कुंभ मेला है, जो हर 12 साल में आता है। इस बार (2028) गुरु के सिंह राशि में आने पर होगा। इसमें क्षिप्रा नदी में शाही स्नान और करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बनेगा। साथ ही सरकार इसे भव्य और स्थायी इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ एक ऐतिहासिक, व्यवस्थित और पर्यावरण-अनुकूल आयोजन बनाने की तैयारी कर रही है।
सिंहस्थ से पहले ई-बस सेवा
सिंहस्थ 2028 से पहले ई-बस सेवा शुरू हो सकती है। ये संभावना ई बस के डिपो निर्माण की तैयारी शुरु होने से बनी है। डिपो के लिए एजेंसी तय हो चुकी है। पीएम ई-बस योजना के तहत उज्जैन को 100 ई-बस मिली थीं। अब तक डिपो की कमी के कारण सेवा शुरू नहीं हो पाई थी। अब यह समस्या हल होने की संभावना है।
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मक्सीरोड पर बनेगा ई-बस डिपो
नगर निगम मक्सी रोड स्थित डिपो को अब ई-बस डिपो बनाया जाएगा। इसके लिए 10.75 करोड़ रुपए का प्रोजेक्ट तैयार किया गया है। टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के बाद, हाल ही में सीएम मोहन यादव ने भूमिपूजन किया। वर्कआर्डर जारी होने के बाद ठेकेदार को 180 दिन में डिपो का निर्माण पूरा करना होगा।
मक्सी रोड पर पुराने डिपो की जमीन पर 21 हजार 762 वर्ग मीटर में ई-बस डिपो बनेगा। इसमें 100 ई-बसें पार्क हो सकेंगी। इसके अलावा, बसों को चार्ज करने के लिए चार्जिंग स्टेशन भी बनाए जाएंगे। इसे स्थापित करने के लिए 2.86 करोड़ रुपए का टेंडर जारी हुआ था।
यहां पहले एमपी रोडवेज का बस डिपो था, लेकिन बाद में नगर निगम ने इसे सिटी बस सर्विस के लिए इस्तेमाल करना शुरू किया। इसमें बस सर्विस को चलाने के लिए जरूरी बिजली और अन्य बुनियादी सुविधाएं भी दी गई हैं।

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उज्जैन को मिली 100 ई-बसें
उज्जैन को पीएम ई-बस योजना के तहत पहले ही 100 ई-बस मिल चुकी हैं। इनमें से 30 बसें नौ मीटर और 70 बसें सात मीटर लंबी हैं। इन बसों के संचालन के लिए सरकार ने एजेंसी भी नियुक्त कर दी है। अपर कलेक्टर पवन सिंह ने बताया कि जल्द ही इन बसों के लिए डिपो का निर्माण शुरू होगा।
अन्य शहरों को भी मिलेंगी ई- बसें
एमपी परिवहन विभाग की बसें उज्जैन ही नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश में चलेंगी। केंद्र सरकार की संशोधित योजना (केंद्र की योजनाएं) के तहत मध्य प्रदेश को कुल 972 ई-बसें मिलेंगी।
| शहर का नाम | ई-बसों की संख्या |
| इंदौर | 270 |
| जबलपुर | 200 |
| भोपाल | 195 |
| ग्वालियर | 100 |
| उज्जैन | 100 |
| देवास | 55 |
| सागर | 32 |
| सतना | 20 |
उज्जैन का अनसुना नियम
उज्जैन के इतिहास में राजा विक्रमादित्य का नाम स्वर्ण अक्षरों में दर्ज है। मान्यता है कि उनके सिंहासन छोड़ने के बाद से आज तक यहां कोई दूसरा राजा रात नहीं बिता सका। कहा जाता है कि इस नगरी के असली राजा केवल महाकाल हैं। आज के दौर में भी कोई मुख्यमंत्री, प्रधानमंत्री या राष्ट्रपति यहां रात में रुकने का साहस नहीं करता। इतिहास गवाह है कि जब भी किसी बड़े राजनेता (जैसे मोरारजी देसाई या येदियुरप्पा) ने यहां रात बिताई, उन्हें जल्द ही अपनी सत्ता से हाथ धोना पड़ा।
उज्जैन के महाकाल मंदिर कैसे जाएं?
उज्जैन का महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग देश के प्रमुख शहरों से जुड़ा हुआ है। यहां का रेलवे स्टेशन, उज्जैन जंक्शन, और सड़क मार्ग दोनों से पहुंचना बहुत आसान है। सबसे पास हवाई अड्डा इंदौर है, जो यहां से करीब 60 किमी दूर है, और वहां से आप टैक्सी ले सकते हैं। मंदिर स्टेशन और बस स्टैंड से लगभग 2-3 किमी दूर है, जहां ऑटो और टैक्सी आसानी से मिल जाती हैं।


