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उज्जैन सिंहस्थ 2028 में नहीं बिछड़ेंगे अपने, RFID बैंड से श्रद्धालुओं पर रखेंगे नजर

उज्जैन सिंहस्थ 2028
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ऐसे समझें पूरा मामला…

  • RFID बैंड से मिलेगी लाइव लोकेशन।
  • RPF और NGO मिलकर बना रहे हैं योजना।
  • सुविधा पूरी तरह निशुल्क रहेगी।
  • प्रयागराज कुंभ में नहीं थी यह व्यवस्था।
  • नासिक 2027 में पहले होगा सफल परीक्षण।

सिंहस्थ 2028 (Simhastha 2028) उज्जैन में करोड़ों श्रद्धालु पहुंचेंगे। भीड़ में बच्चों और बुजुर्गों के गुम होने का खतरा सबसे बड़ी चुनौती है। इस समस्या के समाधान के लिए RPF और महाराष्ट्र के NGO ने मिलकर RFID बैंड ट्रैकिंग (RFID Band Tracking) की अनोखी योजना बनाई है। यह सुविधा पूरी तरह निशुल्क रहेगी और श्रद्धालुओं को तत्काल लाइव लोकेशन उपलब्ध कराएगी।

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सिंहस्थ 2028 की तैयारी

सिंहस्थ 2028 (Simhastha 2028) उज्जैन में आयोजित होने वाला है। इस महाकुंभ में करोड़ों श्रद्धालुओं के आने की संभावना है। इतनी बड़ी भीड़ में परिवार के सदस्यों का बिछड़ना एक गंभीर समस्या है।

खासतौर पर बच्चे और बुजुर्ग सबसे अधिक प्रभावित होते हैं। वे अपना नाम, पता और मोबाइल नंबर भी सही से नहीं बता पाते। इसी समस्या के समाधान के लिए अब एक आधुनिक तकनीक का सहारा लिया जा रहा है।

RFID बैंड तकनीक क्या है?

RFID यानी रेडियो फ्रीक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन (Radio Frequency Identification) एक स्मार्ट ट्रैकिंग तकनीक है। इस बैंड को हाथ में बांधा जाता है। इसमें व्यक्ति की सभी जरूरी जानकारियां दर्ज होती हैं।

सिंहस्थ क्षेत्र (Simhastha Area) में लगे ट्रैकिंग सिस्टम इसे पहचानते हैं। एक क्लिक पर संबंधित व्यक्ति की लाइव लोकेशन (Live Location) मिल जाती है। इससे गुम हुए बच्चे या बुजुर्ग को ढूंढना बेहद आसान हो जाता है।

RPF और NGO की साझेदारी

रेलवे सुरक्षा बल यानी RPF (Railway Protection Force) और महाराष्ट्र के एक प्रतिष्ठित NGO ने मिलकर यह योजना तैयार की है। RPF पोस्ट प्रभारी नरेंद्र कुमार यादव ने इस पहल की जानकारी दी। उनके अनुसार स्टेशन पर उतरते ही श्रद्धालु यह सुविधा ले सकते हैं।

बच्चों और बुजुर्गों की जानकारी दर्ज होते ही RFID बैंड (RFID Band) दिया जाएगा। पूरे सिंहस्थ क्षेत्र में ट्रैकिंग सिस्टम स्थापित किए जाएंगे। गुमशुदा केंद्रों पर NGO के प्रशिक्षित कर्मचारी हर समय तैनात रहेंगे।

निशुल्क श्रद्धालु ट्रैकिंग सेवा

यह सुविधा पूरी तरह निःशुल्क (Free of Cost) रहेगी। RFID बैंड लगाने और व्यक्ति को ढूंढने का पूरा खर्च NGO वहन करेगा। रेलवे विभाग भी इसमें आवश्यक सहयोग प्रदान करेगा।

यह व्यवस्था यात्रियों के लिए अनिवार्य नहीं होगी। जो श्रद्धालु चाहें वे अपनी इच्छा से इस सुविधा का उपयोग कर सकते हैं। शिकायत मिलते ही तत्काल खोज अभियान शुरू किया जाएगा। इस तरह परिवारों को मानसिक शांति मिलेगी।

प्रयागराज कुंभ से एक कदम आगे

यह उल्लेखनीय है कि प्रयागराज कुंभ (Prayagraj Kumbh) में भी ऐसी व्यवस्था नहीं थी। वहां भी लोग अपनों को खोजने के लिए बेहद परेशान हुए थे। मोबाइल का उपयोग न करने वाले लोगों के लिए यह तकनीक विशेष रूप से लाभकारी होगी।

सिंहस्थ 2028 इस मामले में देश के किसी भी धार्मिक आयोजन से आगे रहेगा। यह व्यवस्था भारत के धार्मिक आयोजनों में तकनीक के उपयोग का एक मील का पत्थर साबित होगी।

नासिक कुंभ में होगा परीक्षण

अधिकारियों के अनुसार पहले नासिक कुंभ 2027 (Nashik Kumbh 2027) में इस तकनीक का परीक्षण किया जाएगा। NGO वहां इसे पायलट प्रोजेक्ट के रूप में लागू करेगा।

परीक्षण सफल होने पर उज्जैन सिंहस्थ 2028 (Ujjain Simhastha 2028) में इसे पूरी तरह लागू किया जाएगा। इससे सिस्टम को और बेहतर बनाने का अवसर भी मिलेगा। लाखों परिवारों को इस तकनीक का सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है।

बुजुर्ग और बच्चों की सुरक्षा

सिंहस्थ जैसे विशाल आयोजनों में बुजुर्ग और बच्चे सबसे असुरक्षित होते हैं। वे भीड़ में दिशा खो देते हैं और मदद मांगने में असमर्थ होते हैं। RFID ट्रैकिंग (RFID Tracking) इस खतरे को लगभग खत्म कर देगी।

परिवार के मुखिया के स्मार्टफोन पर लोकेशन अपडेट मिलती रहेगी। गुमशुदा केंद्रों पर त्वरित प्रतिक्रिया सुनिश्चित होगी। इस तरह सिंहस्थ 2028 श्रद्धालुओं के लिए सुरक्षित और यादगार अनुभव बनेगा।

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