शिव जी की पूजा: हिंदू धर्म में भगवान शिव को देवों के देव महादेव कहा जाता है। शिव जी की पूजा बिना आरती के पूरी नहीं मानी जाती है। आरती करने से मन को शांति और आत्मा को सुकून मिलता है। भक्त अपनी श्रद्धा व्यक्त करने के लिए दीपक जलाकर आरती गाते हैं।
आरती के शब्दों में महादेव की महिमा का सुंदर वर्णन होता है। यह परंपरा सदियों से भक्तों के बीच बहुत अधिक लोकप्रिय रही है। हर सुबह और शाम मंदिरों में शिव आरती की गूंज सुनाई देती है। इससे घर और आसपास के वातावरण में सकारात्मक ऊर्जा का वास होता है।

भगवान शिव की आरती
शिव जी की पूजा: ओम जय शिव ओंकारा, स्वामी जय शिव ओंकारा।
ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव, अर्द्धांगी धारा॥ ओम जय…
एकानन चतुरानन पंचानन राजे।
हंसानन गरुड़ासन वृषवाहन साजे॥ ओम जय…
दो भुज चार चतुर्भुज दसभुज अति सोहे।
त्रिगुण रूप निरखते त्रिभुवन जन मोहे॥ ओम जय…
अक्षमाला वनमाला मुण्डमाला धारी।
त्रिपुरारी कंसारी कर माला धारी॥ ओम जय…
श्वेताम्बर पीताम्बर बाघम्बर अंगे।
सनकादिक गरुड़ादिक भूतादिक संगे॥ ओम जय…
कर के मध्य कमंडलु चक्र त्रिशूलधारी।
सुखकारी दुखहारी जगपालन कारी॥ ओम जय…
ब्रह्मा विष्णु सदाशिव जानत अविवेका।
प्रणवाक्षर के मध्ये ये तीनों एका॥ ओम जय…
त्रिगुणस्वामी जी की आरती जो कोई नर गावे।
कहत शिवानंद स्वामी मनवांछित फल पावे॥ ओम जय…

शिव जी की आरती क्यों जरूरी है?
शिव जी की पूजा: आरती का मुख्य अर्थ है अपने आराध्य के प्रति पूर्ण समर्पण। पूजा के दौरान अनजाने में हुई गलतियों की माफी आरती से मिलती है। इससे भक्त का हृदय भगवान शिव की करुणा से भर जाता है। आरती के समय बजने वाले शंख और घंटे मन एकाग्र करते हैं।
नकारात्मक विचार दूर होते हैं और सात्विक बुद्धि का विकास होता है। शिव जी की कृपा से भक्तों के सभी कष्ट कट जाते हैं। आरती करने से कुंडली के दोष भी धीरे-धीरे शांत होने लगते हैं। यह विधि हमें भगवान के और भी करीब लेकर आती है।

आरती कैसे और कब करें?
- शिव जी की पूजा: शिव जी की आरती आमतौर पर प्रदोष काल में शुभ होती है।
- सुबह सूर्योदय और शाम को सूर्यास्त के समय इसे अवश्य करें।
- आरती के लिए शुद्ध घी या कपूर का प्रयोग करना चाहिए।
- सबसे पहले भगवान के चरणों की चार बार आरती उतारें।
- फिर नाभि की दो बार और मुख की एक बार आरती करें।
- अंत में भगवान के पूरे शरीर की सात बार आरती उतारें।
- आरती करते समय पूरी एकाग्रता और सच्ची श्रद्धा का होना अनिवार्य है।
- आरती के बाद जल से आचमन कर सबको प्रसाद बांटना चाहिए।
FAQs (अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न)
1. शिव जी की आरती करते समय किन सामग्रियों की आवश्यकता होती है?
शिव जी की आरती के लिए तांबे या पीतल की थाली चाहिए। इसमें शुद्ध घी का दीपक, कपूर, अक्षत और फूल रखें। घंटी और शंख बजाना भी शिव पूजन में शुभ माना जाता है।
2. क्या शिव जी की आरती रोजाना करना अनिवार्य है?
जी हां, रोजाना आरती करने से घर में सुख-समृद्धि आती है। यदि रोज संभव न हो, तो सोमवार को जरूर करें। सोमवार भगवान शिव का अति प्रिय दिन माना गया है।
3. आरती के दौरान किन विशेष बातों का ध्यान रखना चाहिए?
आरती के समय मन शुद्ध और शांत होना बहुत जरूरी है। आरती को लयबद्ध तरीके से और स्पष्ट शब्दों में बोलना चाहिए। भगवान की प्रतिमा के सामने खड़े होकर ही आरती उतारनी चाहिए।
ये खबरें भी पढ़ें…
क्यों खास है उज्जैन शिप्रा तट की संध्या महाआरती, जानें आरती में शामिल होने के फायदे

