उज्जैन शिप्रा तट: धार्मिक नगरी उज्जैन में मोक्षदायिनी शिप्रा नदी का तट अध्यात्म और शांति का सबसे बड़ा केंद्र है। शिप्रा नदी के किनारे स्थित रामघाट पर हर शाम होने वाली आरती का दृश्य अलौकिक होता है। यहां जलते हुए हजारों दीप और शंखों की गूंज भक्तों के मन को शुद्ध कर देती है।
शास्त्रों के मुताबिक, जो पुण्य गंगा स्नान से मिलता है, वही फल शिप्रा के दर्शन मात्र से प्राप्त होता है। ये आरती न केवल आंखों को सुकून देती है, बल्कि जीवन के तनाव और नकारात्मक ऊर्जा को भी दूर करती है। आइए जानते हैं शिप्रा तट की इस पावन आरती का महत्व और इसके पीछे की धार्मिक मान्यताएं।
शिप्रा आरती कहां होती है

उज्जैन शिप्रा तट की भव्य आरती उज्जैन के प्रसिद्ध रामघाट पर आयोजित की जाती है। यह स्थान महाकालेश्वर मंदिर के काफी करीब स्थित है। संध्या काल में जब सूर्य अस्त होता है, तब पुजारी मंत्रोच्चार के साथ आरती शुरू करते हैं। शिप्रा के जल में दीपों का प्रतिबिंब स्वर्ग जैसा अहसास कराता है।
शिप्रा आरती से क्या-क्या लाभ होते हैं

उज्जैन शिप्रा तट पर आरती देखने और उसमें शामिल होने के कई धार्मिक लाभ हैं:
- पापों से मुक्ति: पुराणों के मुताबिक, शिप्रा के दर्शन मात्र से पाप कट जाते हैं।
- मानसिक शांति: आरती की ध्वनि और वातावरण से तनाव दूर होता है।
- पितृ दोष से राहत: यहां दीपदान करने से पूर्वजों को मोक्ष मिलता है।
- मनोकामना पूर्ति: सच्चे मन से आरती में शामिल होने पर मुरादें पूरी होती हैं।
- सकारात्मक ऊर्जा: मंत्रों के प्रभाव से शरीर और मन में ऊर्जा आती है।
शिप्रा मैया की आरती
ओम पय:स्वतीय विद्महे, उत्तर वाहिनी धीमहि, तन्नो मां क्षिप्रा प्रचोदयात्।।
ओम जय क्षिप्रा मैया, मैया जय क्षिप्रा मैया।
तुम हो मोक्ष प्रदायिनी, पय:स्वती मैया।।
ओम जय क्षिप्रा मैया।।।
जिस पर कृपा तुम्हारी, आनंद वही पाता।
भक्ति इसी जगत में, वो नर पा जाता।।
ओम जय क्षिप्रा मैया।।।
जो जन पितरो का तर्पण, तेरे तट करता।
पितृ वही सहज में, मुक्ति को पाता।।
ओम जय क्षिप्रा मैया।।।
बारह बरस में मैया, लगें कुम्भ मेला।
संत समागम होता, पुण्य घड़ी बैला।।
ओम जय क्षिप्रा मैया।।।
मन निर्मल हो जाता, शरण तेरी जो आता।
पावन महिमा तेरी,नागर है लिखता।।
ओम जय क्षिप्रा मैया।।।
आरती मात तुम्हारी, भाव से जो गाता।
महाकाल की नगरी में, जन्म वही पाता।।
ओम जय क्षिप्रा मैया।।।
ओम जय क्षिप्रा मैया, मैया जय क्षिप्रा मैया।
तुम हो मोक्ष प्रदायिनी, पयःस्वती मैया।।
ओम जय क्षिप्रा मैया,ओम जय क्षिप्रा मैया,ओम जय क्षिप्रा मैया।।,
शिप्रा तट का आध्यात्मिक महत्व
उज्जैन शिप्रा तट को मोक्षदायिनी कहा गया है, जिसका अर्थ है मोक्ष देने वाली। यहां हर 12 साल में सिंहस्थ कुंभ का आयोजन होता है। आरती के समय यहां की ऊर्जा इतनी प्रबल होती है कि भक्त भक्ति में लीन हो जाते हैं। शिप्रा जल का स्पर्श मात्र सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है।
शिप्रा आरती की मुख्य बातें

- समय: हर रोज सूर्यास्त के तुरंत बाद, लगभग शाम 6-7 बजे (मौसम मुताबिक)
- स्थान: उज्जैन का प्रसिद्ध रामघाट
- विधि: पुजारी पवित्र नदी शिप्रा की पूजा करते हैं, दूध चढ़ाते हैं और लाल चुनरी अर्पित करते हैं।
- वातावरण: शंखनाद, घंटियों की ध्वनि और हजारों दीयों से पूरा घाट जगमगा उठता है।
- महत्व: ये आरती नदी के संरक्षण और आध्यात्मिक जागृति के लिए की जाती है।
मध्यप्रदेश के उज्जैन शहर में बहने वाली शिप्रा नदी को अत्यंत पवित्र माना जाता है। यहां के रामघाट पर हर शाम होने वाली शिप्रा आरती एक अद्भुत दृश्य होता है। शंखों की गूंज और हजारों दीपों की रोशनी से पूरा तट जगमगा उठता है।
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