64 योगिनी मंदिर: मध्य प्रदेश के मुरैना जिले में एक अद्भुत ऐतिहासिक धरोहर मौजूद है। इस स्थान को हम मितावली के 64 योगिनी मंदिर के नाम से जानते हैं। ये मंदिर पहाड़ी पर स्थित है और इसका आकार बिल्कुल गोल है।
यह मंदिर भारतीय वास्तुकला का एक बहुत ही शानदार उदाहरण माना जाता है। स्थानीय लोग इस मंदिर को इकंतेश्वर महादेव मंदिर भी कहकर पुकारते हैं। इस मंदिर की बनावट को देखकर हर कोई हैरान रह जाता है।
इतिहासकारों के मुताबिक, इस मंदिर का निर्माण नौवीं शताब्दी में हुआ था। कच्छपघात राजा देवपाल ने इस भव्य मंदिर को बनवाया था। तब से यह स्थान देश के प्रमुख ऐतिहासिक स्थलों में गिना जाता है।
क्या है मंदिर की पौराणिक कथा
64 योगिनी मंदिर: इस मंदिर के निर्माण को लेकर कई पौराणिक कथाएं प्रचलित हैं। माना जाता है कि योगिनियां माता दुर्गा का ही रूप होती हैं। दुष्ट राक्षसों का संहार करने के लिए इनका जन्म हुआ था।
कथा के मुताबिक, घोर संग्राम के समय इन देवियों ने प्रकट होकर असुरों का वध किया था। राजा ने इन सभी शक्तियों को सम्मान देने के लिए इस मंदिर को बनवाया। तब से यहां इनकी पूजा होने लगी।
स्थानीय लोग मानते हैं कि आज भी रात में यहां अदृश्य शक्तियां आती हैं। इसलिए शाम के बाद मंदिर में रुकने की अनुमति नहीं है। सूरज ढलते ही यह स्थान पूरी तरह शांत हो जाता है।
संसद भवन और मंदिर का नाता
64 योगिनी मंदिर: इस मंदिर की सबसे बड़ी खासियत इसकी विशेष गोलाकार बनावट है। बहुत से लोग मानते हैं कि हमारा पुराना संसद भवन इसी से प्रेरित था। इतिहासकारों के मुताबिक, ब्रिटिश वास्तुकार एडविन लुटियंस ने इस मंदिर को देखा था।
लुटियंस ने मंदिर के डिजाइन का उपयोग संसद भवन के लिए किया। दोनों इमारतों के खंभों और गलियारों में काफी समानता दिखाई देती है। हालांकि सरकारी डाक्यूमेंट्स में इसका कोई स्पष्ट प्रमाण नहीं मिलता है।
फिर भी दोनों की बनावट को देखकर यह बात सच लगती है। मंदिर के अंदर भी संसद की तरह एक बड़ा केंद्रीय कक्ष है। यही कारण है कि यह मंदिर पर्यटकों के बीच लोकप्रिय है।
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मंदिर की अद्भुत वास्तुकला
यह मंदिर जमीन से करीब सौ फीट ऊंची पहाड़ी पर बना है। मंदिर तक पहुंचने के लिए आपको कई सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं। ऊपर पहुंचते ही आपको एक अद्भुत नजारा देखने को मिलता है।
इस मंदिर में कुल चौंसठ छोटे-छोटे कमरे बने हुए हैं। हर कमरे में एक शिवलिंग और योगिनी की मूर्ति स्थापित थी। हालांकि अब कई मूर्तियां चोरी हो चुकी हैं या नष्ट हैं।
मंदिर के ठीक बीच में एक बहुत बड़ा मुख्य मंडप है। इस मंडप में एक विशाल शिवलिंग स्थापित किया गया है। मंदिर का खुला हुआ आकाश इसे और भी सुंदर बनाता है।
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तांत्रिक साधना का बड़ा केंद्र
64 योगिनी मंदिर: प्राचीन समय में यह मंदिर कोई सामान्य पूजा स्थल नहीं था। यह तांत्रिकों के लिए साधना करने का एक मुख्य केंद्र था। देश-विदेश से लोग यहां तंत्र विद्या सीखने आते थे।
इस मंदिर को तांत्रिक यूनिवर्सिटी के रूप में भी जाना जाता था। यहां पर ज्योतिष और गणित की शिक्षा भी दी जाती थी। लोग रात के समय यहां आने से आज भी डरते हैं।
मान्यता है कि यहां आज भी तांत्रिक शक्तियां मौजूद हैं। तांत्रिक लोग यहां रात में गुप्त पूजा किया करते थे। इसलिए इस जगह का माहौल हमेशा रहस्यमयी बना रहता है।
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भूकंप से सुरक्षित है ढांचा
यह पूरा मंदिर बिना किसी मॉडर्न सीमेंट के बनाया गया है। इसे केवल बड़े-बड़े पत्थरों को जोड़कर तैयार किया गया था। इसके बावजूद यह मंदिर सदियों से मजबूती से खड़ा है।
यह क्षेत्र भूकंप के लिहाज से काफी संवेदनशील माना जाता है। फिर भी कई बड़े भूकंप इस मंदिर का कुछ नहीं बिगाड़ पाए। इसकी इंजीनियरिंग आज के वैज्ञानिकों को भी हैरान कर देती है।
मंदिर की छत को इस तरह बनाया गया है कि बारिश का पानी जमा नहीं होता। सारा पानी सीधे नीचे बने एक गुप्त टैंक में चला जाता है। यह जल संरक्षण का प्राचीन और बेहतरीन उदाहरण है।
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उपसंहार और वर्तमान स्थिति
आज यह मंदिर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के संरक्षण में सुरक्षित है। सरकार इसके इतिहास को सहेजने का पूरा प्रयास कर रही है। देश-विदेश से लोग इस अनोखे अजूबे को देखने आते हैं।
अगर आप इतिहास और रहस्य के शौकीन हैं तो यहां जरूर आएं। यह मंदिर हमें अपने गौरवशाली प्राचीन भारत की याद दिलाता है। इसकी सुंदरता और शांति आपका मन मोह लेगी।
मध्य प्रदेश का यह गौरव हमेशा हमारे इतिहास में अमर रहेगा। हमें अपनी ऐसी प्राचीन धरोहरों का सम्मान और रक्षा करनी चाहिए। यह मंदिर हमारे पूर्वजों की बुद्धिमानी का जीता जागता प्रमाण है।
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