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गणेश जी की पीठ देखने से आती है दरिद्रता, जानें क्या कहती है पौराणिक कथा

गणेश जी की पीठ
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गणेश जी की पीठ: हिंदू धर्म में भगवान गणेश की पूजा सबसे पहले की जाती है। किसी भी शुभ काम की शुरुआत बप्पा के नाम से होती है। गणेश जी अपने भक्तों के सारे कष्ट पल में हर लेते हैं। उनकी पूजा करने से जीवन में सुख और समृद्धि आती है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि बप्पा के दर्शन का एक खास नियम है?

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शास्त्रों में गणेश जी की पीठ देखना मना किया गया है। अगर कोई व्यक्ति गलती से भी पीठ देखता है तो नुकसान होता है। माना जाता है कि ऐसा करने से पुण्य फल भी नष्ट हो जाते हैं। आइए जानते हैं कि इसके पीछे का पौराणिक रहस्य क्या है।

गणेश जी की पीठ में दरिद्रता का वास

गणेश जी की पीठ: पौराणिक मान्यताओं के मुताबिक, भगवान गणेश के प्रत्येक अंग में दिव्य शक्तियों का वास माना गया है। शास्त्रों में बप्पा के आगे के भाग को अत्यंत शुभ और मंगलकारी बताया गया है। उनके विशाल पेट में पूरी सृष्टि का धन, वैभव और समृद्धि समाई हुई है। गणेश जी के सम्मुख भाग में बुद्धि, ऋद्धि और सिद्धि निवास करती हैं। यही कारण है कि सामने से बप्पा के दर्शन करने पर व्यक्ति को ज्ञान, सुख और सफलता की प्राप्ति होती है।

हालांकि, गणेश जी की पीठ के दर्शन को लेकर शास्त्रों में कड़ा नियम बनाया गया है। धार्मिक ग्रंथों के मुताबिक, बप्पा की पीठ में दरिद्रता (अलक्ष्मी) का वास होता है। देवी अलक्ष्मी को दुख, दरिद्रता और आर्थिक संकट की देवी माना जाता है। मान्यता है कि यदि कोई व्यक्ति अनजाने में या गलती से भी गणेश जी की पीठ देख लेता है, तो उस पर अलक्ष्मी का अशुभ प्रभाव पड़ने लगता है।

पीठ के दर्शन करने से इंसान के जीवन में दुखों का पहाड़ टूट पड़ता है। घर की जमा पूंजी और धन-धान्य धीरे-धीरे समाप्त होने लगता है। इंसान को व्यापार में घाटा और मानसिक तनाव झेलना पड़ता है। यही वजह है कि पूजा या दर्शन के दौरान भक्तों को बप्पा की पीठ देखने से हमेशा मना किया जाता है। यदि गलती से पीठ दिख जाए, तो तुरंत सम्मुख आकर क्षमा मांगनी चाहिए।

पौराणिक कथा में छिपा है बड़ा रहस्य

गणेश जी की पीठ: पौराणिक मान्यताओं के मुताबिक, जब भगवान शिव और माता पार्वती ने श्री गणेश का सृजन किया, तब समस्त देवों ने उन्हें प्रथम पूज्य का स्थान दिया। इस दौरान ब्रह्मांडीय ऊर्जा और शक्तियों का संतुलन बनाने के लिए बप्पा के स्वरूप में विशेष व्यवस्था की गई।

भगवान गणेश का मुख और विशाल उदर (पेट) सुख, समृद्धि, ज्ञान और रिद्धि-सिद्धि का केंद्र बना। उनके सामने के भाग को असीम सकारात्मक ऊर्जा और शुभता का प्रतीक माना गया। यहां स्वयं धन-धान्य की देवी लक्ष्मी निवास करती हैं।

धार्मिक ग्रंथों के मुताबिक, गणेश जी के पृष्ठ भाग यानी पीठ में अलक्ष्मी और दरिद्रता का वास माना गया है। अलक्ष्मी को नकारात्मकता, दुख और आर्थिक तंगी की देवी कहा जाता है। यही कारण है कि बप्पा की पीठ के दर्शन करना शास्त्रों में पूरी तरह वर्जित है।

मान्यता है कि जो व्यक्ति गणेश जी के सामने सिर झुकाता है, उसके जीवन से विघ्न-बाधाएं दूर होती हैं और घर में सुख-समृद्धि आती है। इसके ठीक विपरीत, अनजाने में भी बप्पा की पीठ देखने पर दरिद्रता का प्रभाव बढ़ता है और इंसान संकटों से घिर जाता है। इसी संतुलन को बनाए रखने के लिए भक्त हमेशा बप्पा के सम्मुख होकर ही प्रार्थना करते हैं।

ऋद्धि और सिद्धि का मिलता है आशीर्वाद

गणेश जी के सम्मुख खड़े होकर दर्शन करने का धार्मिक और पौराणिक महत्व अत्यंत गहरा माना गया है। पौराणिक मान्यताओं में भगवान गणेश के अग्र भाग में समस्त ब्रह्मांड की सकारात्मक ऊर्जा, समृद्धि और शुभता का वास होता है। जब कोई भक्त सच्चे मन से बप्पा की प्रतिमा के सामने खड़ा होकर प्रार्थना करता है, तो उसे सीधे तौर पर रिद्धि और सिद्धि देवी का अलौकिक आशीर्वाद प्राप्त होता है।

शास्त्रों में रिद्धि जी को धन, समृद्धि, बुद्धि और आत्मिक ज्ञान की देवी माना गया है, जबकि सिद्धि जी कार्य में सफलता, सिद्धि और सर्व-कल्याण प्रदान करती हैं। इन दोनों देवियों के संग बप्पा के सामने विराजमान रहने से साधक के जीवन के सभी विघ्न और बाधाएं पल भर में समाप्त हो जाती हैं।

इसके साथ ही गणेश जी के पुत्र शुभ और लाभ का वास भी उनके अग्र भाग में ही होता है, जिससे घर में सुख-समृद्धि का स्थायी वास बनता है।मान्यता है कि बप्पा के सामने से दर्शन करने पर व्यक्ति को ज्ञान, मान-सम्मान और अटूट धन की प्राप्ति होती है। इसलिए शास्त्रों में हमेशा गणेश जी के सम्मुख खड़े होकर ही दर्शन करने की सलाह दी जाती है।

गलती से पीठ दिख जाए तो क्या करें

शास्त्रों और धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, गणेश जी की पीठ के दर्शन करना वर्जित माना गया है। भगवान गणेश की पीठ में अलक्ष्मी यानी दरिद्रता का वास होता है। इसलिए बप्पा की पीठ देखने से घर में आर्थिक तंगी, मानसिक क्लेश और दरिद्रता आने की मान्यता है।

हालांकि मंदिर की परिक्रमा करते समय या अनजाने में कई बार बप्पा की पीठ के दर्शन हो जाते हैं। ऐसी स्थिति में घबराने या परेशान होने की जरूरत नहीं है। अगर गलती से गणेश जी की पीठ दिख जाए, तो तुरंत अपनी जगह रुक जाएं। इसके बाद घूमकर तुरंत भगवान गणेश के सामने आ जाएं। बप्पा के सामने हाथ जोड़कर सिर झुकाएं और अपनी इस अनजानी भूल के लिए सच्चे मन से क्षमा याचना करें। इसके साथ ही मन ही मन ‘ॐ गं गणपतये नमः’ मंत्र का जाप करें।

धार्मिक मान्यता है कि गणेश जी अत्यंत दयालु और प्रथम पूज्य देव हैं। वे अपने भक्तों के छल-कपट से रहित सच्चे भाव और भक्ति को देखते हैं। सच्चे मन से क्षमा मांगने पर वे अपने भक्तों का हर अपराध और दोष तुरंत क्षमा कर देते हैं।

घर में मूर्ति रखते समय रखें ध्यान

शास्त्रों और धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, घर के मंदिर में गणेश जी की मूर्ति स्थापित करते समय कुछ विशेष नियमों का ध्यान रखना अत्यंत आवश्यक माना गया है। गणेश जी की पीठ में अलक्ष्मी यानी दरिद्रता का वास होता है, इसलिए मूर्ति को हमेशा इस तरह रखें कि उसकी पीठ दीवार से सटकर रहे और किसी को सीधे दिखाई न दे।

इसके अलावा, घर में गणेश जी की दो मूर्तियां एक साथ रखने से बचना चाहिए। यदि दो मूर्तियां घर में मौजूद हैं, तो ध्यान रखें कि उनकी पीठ एक-दूसरे से न टकराए। मान्यताओं के मुताबिक, पीठ टकराने से घर में वास्तु दोष उत्पन्न होता है, जिससे परिवार के सदस्यों के बीच कलह, मनमुटाव और मानसिक तनाव बढ़ने लगता है। सही दिशा और नियम से स्थापित प्रतिमा घर में सुख, समृद्धि और शांति लाती है।

डिस्क्लेमर: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी पूरी तरह से सही या सटीक होने का हम कोई दावा नहीं करते हैं। ज्यादा और सही डिटेल्स के लिए, हमेशा उस फील्ड के एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें।

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