सिंहस्थ 2028: सिंहस्थ में हर बार लाखों श्रद्धालु उज्जैन पहुंचते हैं। कई बार श्रद्धालुओं को पंडों के रूखे व्यवहार का सामना करना पड़ता है। ऑटो और टैक्सी ड्राइवरों की मनमानी की शिकायतें भी आती रही हैं। इस बार प्रशासन इस समस्या को जड़ से सुलझाना चाहता है।
मध्यप्रदेश टूरिज्म बोर्ड ने भारतीय पर्यटन एवं यात्रा प्रबंधन संस्थान (IITTM – Indian Institute of Tourism and Travel Management) को यह जिम्मा सौंपा है। संस्थान पंडों, पुजारियों और ड्राइवरों को मेहमाननवाजी का प्रशिक्षण देगा। ट्रेनिंग के दूसरे चरण में यह कार्यक्रम पूरे मध्य प्रदेश में चलाया जाएगा।
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क्या सीखेंगे पंडे-पुजारी
सिंहस्थ 2028: ट्रेनिंग में पंडा बाबा और पुजारियों को कई जरूरी बातें सिखाई जाएंगी। श्रद्धालुओं से विनम्र और सम्मानजनक व्यवहार कैसे करें यह सिखाया जाएगा। गुस्से या तनाव की स्थिति में धैर्य बनाए रखने का अभ्यास कराया जाएगा।
महिलाओं, बुजुर्गों और दिव्यांगों की मदद कैसे करें यह भी सिखाया जाएगा। भीड़ प्रबंधन के सही तरीके बताए जाएंगे। श्रद्धालुओं को सही जानकारी और स्पष्ट मार्गदर्शन देने का प्रशिक्षण भी मिलेगा।
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फील्ड विजिट से सीखेंगे
सिंहस्थ 2028: संस्थान की डायरेक्टर मोनिका प्रकाश के अनुसार प्रतिभागियों को IITTM परिसर में ही ठहराया जाएगा। उनके खाने-पीने का पूरा इंतजाम भी कैंपस में होगा। प्रतिभागियों को फील्ड विजिट पर भी ले जाया जाएगा। इससे वे वास्तविक परिस्थितियों को बेहतर समझ सकेंगे।
ड्राइवरों की ट्रेनिंग में क्या होगा खास
सिंहस्थ 2028: ऑटो और टैक्सी ड्राइवरों के लिए भी अलग प्रशिक्षण तय किया गया है। उन्हें फर्स्टएड और सुरक्षित ड्राइविंग सिखाई जाएगी। यात्रियों से मुस्कुराकर बात करना भी पाठ्यक्रम का हिस्सा होगा।
सही किराया लेना और पारदर्शिता रखना सिखाया जाएगा। GPS और वैकल्पिक रास्तों का इस्तेमाल भी बताया जाएगा। हादसे की स्थिति में तुरंत मदद कैसे करें यह भी प्रशिक्षण का अहम हिस्सा होगा। शहर के प्रमुख स्थलों की जानकारी भी ड्राइवरों को दी जाएगी।
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रोज मिलेगा स्टाइपेंड
ट्रेनिंग के दौरान कई प्रतिभागियों का रोजाना काम बंद रहेगा। इससे उन्हें आर्थिक नुकसान हो सकता है। इसकी भरपाई के लिए सरकार हर प्रतिभागी को रोजाना भत्ता देगी। यह राशि 400 से 500 रुपए प्रतिदिन तय की गई है।
संस्थान के विशेषज्ञ अलग-अलग सत्रों में प्रशिक्षण देंगे। इनमें व्यवहार कौशल, आपदा प्रबंधन और संवाद जैसे विषय शामिल होंगे। इसके लिए संबंधित विभाग को प्रस्ताव भेजा जा चुका है।
क्यों जरूरी है यह पहल
उज्जैन सिंहस्थ 2028 जैसे बड़े आयोजन में श्रद्धालुओं का अनुभव बहुत मायने रखता है। एक भी बुरा अनुभव पूरे आयोजन की छवि बिगाड़ सकता है। प्रशासन की कोशिश है कि श्रद्धालु यहां से सिर्फ अच्छी यादें लेकर जाएं।
इस तरह की ट्रेनिंग पहली बार इस स्तर पर कराई जा रही है। अगर यह सफल रहती है, तो आगे के बड़े आयोजनों में भी इसे लागू किया जा सकता है।
नुकसान की भरपाई के लिए स्टाइपेंड
ट्रेनिंग के दौरान कई दिनों तक प्रतिभागियों का अपना खुद का काम बंद रहेगा। इससे उनके परिवार को बड़ा आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।
सरकार ने इस समस्या का भी एक बहुत ही बेहतरीन हल निकाला है। ट्रेनिंग में शामिल होने वाले हर शख्स को रोजाना का भत्ता दिया जाएगा।
यह राशि 400 से 500 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से तय की गई है। इसके लिए संबंधित विभाग को बजट का फाइनल प्रस्ताव भेजा जा चुका है।
आपदा प्रबंधन के भी मिलेंगे टिप्स
संस्थान के सीनियर और अनुभवी विशेषज्ञ इस ट्रेनिंग के अलग-अलग सत्र लेंगे। इसमें मुख्य रूप से व्यवहार कौशल और संवाद करने के तरीके सिखाए जाएंगे।
मेले में किसी भी अनहोनी से निपटने के लिए आपदा प्रबंधन भी सिखाया जाएगा। हादसे के वक्त तुरंत एम्बुलेंस बुलाना और प्राथमिक उपचार देना सिखाएंगे।
इस अनूठी पहल से उज्जैन की छवि देश-दुनिया में और भी शानदार बनेगी। श्रद्धालु यहाँ से केवल सुखद और खूबसूरत यादें लेकर ही अपने घर लौटेंगे।
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