समझें क्या है पूरा मामला
- उज्जैन महाकाल मंदिर के अन्नक्षेत्र में अब दक्षिण भारतीय भोजन भी मिलेगा।
- मंगलवार से इसकी शुरुआत हो चुकी है।
- हर मंगलवार और शुक्रवार को साउथ इंडियन डिशेज प्रसाद के रूप में मिलेंगी।
- मंगलवार को इडली, सांभर, पोंगल जैसे व्यंजन परोसे जाएंगे।
- अन्नक्षेत्र में एक साथ 370 श्रद्धालु बैठकर भोजन कर सकते हैं।
अन्नक्षेत्र में दक्षिण भारतीय भोजन
उज्जैन के महाकाल मंदिर से एक दिलचस्प खबर सामने आई है। मंदिर के अन्नक्षेत्र में अब दक्षिण भारतीय भोजन भी परोसा जा रहा है। मंगलवार से इसकी शुरुआत कर दी गई है। मंदिर प्रशासन ने इसकी पुष्टि की है। अब हर मंगलवार और शुक्रवार को यह भोजन मिलेगा। श्रद्धालुओं को प्रसाद के रूप में साउथ इंडियन डिशेज दी जाएंगी।
मंदिर प्रशासन का दावा है कि यह मध्य प्रदेश में पहली बार हुआ है। ऐसा दावा प्रशासन की ओर से साफ तौर पर किया गया है। किसी भी मंदिर के अन्नक्षेत्र में ऐसा पहले नहीं हुआ। यह फैसला विविधता में एकता की भावना को ध्यान में रखकर लिया गया है। मंदिर प्रशासन चाहता है कि सभी क्षेत्रों के स्वाद यहां मिलें। इससे दूसरे राज्यों से आने वाले श्रद्धालु भी जुड़ाव महसूस करेंगे।
मंदिर प्रशासन मानता है कि भोजन भी आस्था जोड़ने का जरिया है। इसी सोच के साथ यह नया कदम उठाया गया है। आने वाले दिनों में इसे और बेहतर बनाने की योजना है।
मंगलवार-शुक्रवार का खास मेन्यू
उप प्रशासक सिम्मी यादव ने पूरी जानकारी साझा की। उनके मुताबिक मंगलवार को खास मेन्यू तैयार किया गया है। इस दिन श्रद्धालुओं को सांभर परोसा जाएगा। साथ में इडली, स्टीम राइस, मौसमी सब्जी भी मिलेगी। पोंगल भी मंगलवार के प्रसाद में शामिल किया गया है।
शुक्रवार के लिए भी अलग मेन्यू बनाया गया है। इस दिन पुलिहरा और पायसम परोसा जाएगा। साथ ही रसम, स्टीम राइस और मौसमी सब्जी भी दी जाएगी। अब तक अन्नक्षेत्र में पारंपरिक भोजन ही परोसा जाता था। इसमें दाल, चावल, रोटी, सब्जी और मिठाई शामिल होती थी। अब यह मेन्यू और भी विविध हो गया है। श्रद्धालुओं को अब हफ्ते में दो दिन कुछ नया खाने को मिलेगा।
मंदिर प्रशासन का कहना है कि स्वच्छता का भी ध्यान रखा जाएगा। भोजन बनाने में शुद्ध और ताजी सामग्री का ही इस्तेमाल होगा।
बड़े पर्व पर बंटते हैं भोजन पैकेट
प्रशासक प्रथम कौशिक ने अन्नक्षेत्र की व्यवस्था के बारे में बताया। यह अन्नक्षेत्र मंदिर की स्मार्ट पार्किंग में स्थित है। इसका संचालन मंदिर प्रबंध समिति करती है। इसकी शुरुआत 5 सितंबर 2023 से हुई थी। यहां एक साथ 370 भक्तों के बैठने की व्यवस्था है।
अन्नक्षेत्र सुबह 11.30 बजे से रात 9 बजे तक खुला रहता है। शाम 5 से 6 बजे के बीच यह अस्थायी रूप से बंद रहता है। इस दौरान सफाई और भोजन बनाने का काम होता है। बड़े पर्व के मौके पर व्यवस्था थोड़ी बदल जाती है। ऐसे मौकों पर यहां से भोजन के पैकेट बनाए जाते हैं। ये पैकेट श्रद्धालुओं में बांटे जाते हैं।
रोज लगता है सैकड़ों किलो राशन
महाकाल मंदिर के अन्नक्षेत्र में आधुनिक मशीनें लगी हैं। इन मशीनों से रोज बड़ी मात्रा में प्रसाद तैयार होता है। हर दिन करीब 350 किलो आटा इस्तेमाल होता है। इसके साथ 60 किलो दाल भी लगती है। चावल की खपत भी काफी ज्यादा रहती है। रोजाना 125 किलो चावल इस्तेमाल में लाया जाता है।
सब्जियों की मात्रा भी बड़ी होती है। हर दिन लगभग 250 किलो सब्जी काम में आती है। खाना पकाने के लिए 15 किलो तेल भी लगता है। यह पूरा हिसाब अन्नक्षेत्र के रोजाना संचालन का है।
खीर के लिए रोज 125 किलो दूध
खीर बनाने के लिए भी खास मात्रा में सामग्री लगती है। रोज करीब 125 किलो दूध खीर के लिए इस्तेमाल होता है। इसमें 20 किलो शक्कर भी मिलाई जाती है। साथ ही 500 ग्राम सूखे मेवे भी डाले जाते हैं। खीर में चावल चूरी का भी इस्तेमाल होता है। इसके लिए रोज 8 किलो चावल चूरी लगती है।
हलवा बनाने में भी अलग सामग्री का इस्तेमाल होता है। हलवे के लिए 15 किलो सूजी रोज इस्तेमाल होती है। इसमें भी 20 किलो शक्कर मिलाई जाती है। एक किलो सूखे मेवे हलवे में भी डाले जाते हैं। शुद्ध घी की मात्रा भी तय है। हलवे के लिए रोज 10 किलो शुद्ध घी लगता है।
श्रद्धालुओं के लिए बड़ी पहल
मंदिर प्रशासन की यह पहल श्रद्धालुओं को खूब पसंद आ रही है। दक्षिण भारत से आने वाले भक्तों को अपने घर जैसा स्वाद मिलेगा। यह कदम मंदिर की सेवा भावना को भी दिखाता है। महाकाल मंदिर देशभर से आने वाले भक्तों का केंद्र है। ऐसे में यह पहल सभी के लिए खास मानी जा रही है। आने वाले समय में मेन्यू में और बदलाव भी हो सकते हैं।
फिलहाल श्रद्धालु इस नई शुरुआत से काफी खुश नजर आ रहे हैं। सोशल मीडिया पर भी इस खबर को खूब पसंद किया जा रहा है। कई श्रद्धालुओं ने मंदिर प्रशासन के इस फैसले की सराहना भी की है। आने वाले समय में महाकाल मंदिर की यह पहल और चर्चा में रहेगी।
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