समझें क्या है पूरा मामला…
- उज्जैन महाकाल मंदिर में अब QR से बुक होगा लॉकर, मोबाइल रखो निश्चिंत।
- महाकाल दर्शन होगा हाईटेक, डिजिटल लॉकर से मिलेगी राहत।
- जूता-चप्पल से मोबाइल तक, महाकाल में सब सुरक्षित रहेगा।
- OTP से खुलेगा लॉकर, महाकाल मंदिर में नई डिजिटल व्यवस्था।
- उज्जैन महाकाल: अब सामान की चिंता छोड़ो, बस दर्शन करो।
उज्जैन महाकाल मंदिर: उज्जैन के विश्व प्रसिद्ध महाकालेश्वर मंदिर में दर्शन करने आने वाले श्रद्धालुओं को जल्द ही हाईटेक डिजिटल लॉकर की सुविधा मिलने वाली है। मंदिर प्रबंध समिति ने मोबाइल, जूता-चप्पल और सामान रखने के लिए डिजिटल लॉकर की स्थापना, संचालन और रखरखाव के लिए निजी एजेंसी के चयन की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
श्रद्धालु क्यूआर (QR – Quick Response) कोड स्कैन कर लॉकर बुक कर सकेंगे और ओटीपी (OTP – One Time Password) या क्यूआर कोड से सामान वापस ले सकेंगे। पूरी लागत एजेंसी उठाएगी और महाकाल मंदिर प्रबंध समिति को राजस्व में हिस्सा मिलेगा। शुल्क कितना होगा यह अभी तय नहीं है।
महाकाल में बदलेगी दर्शन की तस्वीर
उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में हर रोज हजारों श्रद्धालु पहुँचते हैं। सुरक्षा कारणों से मंदिर परिसर में मोबाइल फोन और कई अन्य चीजें ले जाना प्रतिबंधित है। ऐसे में श्रद्धालुओं को अपना सामान अलग-अलग जगहों पर रखना पड़ता है, जो न सुरक्षित है और न सुविधाजनक। अब यह परेशानी दूर होने वाली है।
QR स्कैन करो, लॉकर बुक करो
उज्जैन महाकाल मंदिर: मंदिर प्रबंध समिति ने जो प्रस्ताव तैयार किया है, उसके अनुसार पूरी व्यवस्था डिजिटल होगी। श्रद्धालु मंदिर परिसर के बाहर या निर्धारित लॉकर केंद्र पर पहुंचकर क्यूआर कोड स्कैन करेंगे।
अपनी पसंद की भाषा चुनेंगे, मोबाइल नंबर दर्ज करेंगे और डिजिटल भुगतान कर लॉकर बुक कर सकेंगे। सामान रखने के बाद उन्हें एक विशेष क्यूआर कोड या ओटीपी मिलेगा। दर्शन के बाद इसी से सामान वापस मिलेगा।
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तीन तरह के लॉकर होंगे
उज्जैन महाकाल मंदिर: यह सुविधा तीन श्रेणियों में होगी। मोबाइल फोन, जूता-चप्पल और बड़े सामान (बैगेज) के लिए अलग-अलग लॉकर की व्यवस्था होगी। हर लॉकर की उपलब्धता, उपयोग और आय की जानकारी मंदिर प्रशासन को एक डैशबोर्ड पर रियल टाइम में मिलती रहेगी।
एजेंसी उठाएगी पूरी लागत
इस प्रोजेक्ट की खास बात यह है कि मंदिर समिति को एक भी रुपया खर्च नहीं करना है। चयनित एजेंसी को लॉकर स्थापना, सॉफ्टवेयर विकास, संचालन, रखरखाव और तकनीकी सहायता का पूरा खर्च खुद उठाना होगा। मंदिर समिति केवल जगह देगी। बदले में एजेंसी समिति के साथ राजस्व साझा करेगी।
शुल्क अभी तय नहीं
श्रद्धालुओं के मन में सबसे बड़ा सवाल यह है कि लॉकर के लिए कितना पैसा देना होगा। इसका जवाब अभी नहीं है। निविदा (Tender) प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही शुल्क तय होगा।
एजेंसी शुल्क का प्रस्ताव देगी, लेकिन अंतिम मंजूरी मंदिर समिति के प्रशासक की होगी। समिति को शुल्क की अधिकतम सीमा तय करने और उसे नियंत्रित करने का पूरा अधिकार होगा।
24 घंटे सेवा और साइबर सुरक्षा
मंदिर समिति ने एजेंसी के लिए कड़ी शर्तें रखी हैं। चयनित एजेंसी को 24 घंटे सेवा देनी होगी। साइबर सुरक्षा, डेटा गोपनीयता, विद्युत सुरक्षा और आपदा प्रबंधन के मानकों का पालन अनिवार्य होगा। हर लेन-देन का रिकॉर्ड सुरक्षित रखना, रोज का बैकअप लेना और शिकायत निवारण प्रणाली चलाना भी जरूरी होगा।
देश के चुनिंदा मंदिरों में होगा महाकाल
अगर यह परियोजना समय पर लागू हो गई तो महाकालेश्वर मंदिर देश के उन गिने-चुने धार्मिक स्थलों में शामिल हो जाएगा जहां पूरी तरह डिजिटल लॉकर सुविधा उपलब्ध है। मंदिर प्रबंधन में पारदर्शिता और आधुनिकता का यह एक नया अध्याय होगा।
डिस्क्लेमर: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी पूरी तरह से सही या सटीक होने का हम कोई दावा नहीं करते हैं। ज्यादा और सही डिटेल्स के लिए, हमेशा उस फील्ड के एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें।
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