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नर्मदा घाटों की बदलेगी सूरत, विधायक निधि से होगा सफाई और विकास का काम

नर्मदा घाटों की बदलेगी सूरत
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उज्जैन में साल 2028 में सिंहस्थ मेला लगेगा। इसकी तैयारी अभी से शुरू हो गई है। नर्मदा नदी के घाटों की सफाई पर खास ध्यान दिया जा रहा है। इस बार सरकार ने सफाई का पूरा तरीका ही बदल दिया है।

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सिंहस्थ में क्यों जरूरी सफाई

नर्मदा घाटों की बदलेगी सूरत: सिंहस्थ मेला हर 12 साल में उज्जैन में लगता है। इसमें देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु नर्मदा में स्नान करने आते हैं। पिछले आयोजनों में घाटों की सफाई और भीड़ प्रबंधन बड़ी चुनौती रही थी। इस बार सरकार पहले से ही तैयारी में जुट गई है। घाटों की सफाई से श्रद्धालुओं को अच्छा अनुभव मिलेगा। इससे नदी का पानी भी साफ रहेगा।

पहले कौन करता था सफाई

अब तक घाटों की सफाई और रखरखाव की जिम्मेदारी नगर निकायों और पंचायतों की होती थी। लेकिन नतीजे उम्मीद के मुताबिक नहीं आए। कई घाटों पर गंदगी और अतिक्रमण की शिकायतें लगातार आती रहीं। इसी वजह से सरकार ने अब विधायकों को सीधे जिम्मेदारी देने का फैसला किया है। माना जा रहा है कि विधायक अपने इलाके में बेहतर निगरानी कर पाएंगे।

दीपावली बाद शुरू होगा काम

सरकार ने घाटों की सफाई की जिम्मेदारी बदल दी है। प्रस्ताव के अनुसार दीपावली के बाद यह काम शुरू होगा। भाजपा और कांग्रेस दोनों दलों के विधायक अपने-अपने इलाके के घाट संवारेंगे। इसके लिए विधायक निधि से पैसा खर्च होगा। अभी यह तय नहीं है कि कौन सा विभाग इस काम को लीड करेगा। जल्द ही नोडल विभाग का फैसला हो सकता है।

16 जिलों के घाट होंगे शामिल

यह योजना नर्मदा नदी से जुड़े 16 जिलों में लागू होगी। ये जिले अनूपपुर से लेकर अलीराजपुर तक फैले हुए हैं। नर्मदा के बहाव क्षेत्र में आने वाले सभी बड़े घाट इसमें शामिल किए गए हैं। सरकार का मकसद पूरे नदी किनारे को साफ और सुंदर रखना है। इससे सिंहस्थ में आने वाले श्रद्धालुओं को बड़ी सुविधा मिलेगी।

किस जिले में कौन सा घाट

नर्मदा घाटों की बदलेगी सूरत: इस योजना में अनूपपुर का अमरकंटक घाट शामिल है। इसके अलावा डिंडोरी, मंडला और सिवनी के घाट भी लिए गए हैं। जबलपुर के भेड़ाघाट और ग्वारीघाट को भी सूची में रखा गया है। नरसिंहपुर का बरमान घाट, रायसेन और नर्मदापुरम का सेठानी घाट भी इसमें शामिल हैं।

हरदा के हंडिया घाट के साथ सीहोर के बुधनी और आंवली घाट भी योजना का हिस्सा हैं। देवास का नेमावर घाट, खंडवा का ओंकारेश्वर घाट और खरगोन का महेश्वर घाट भी इसमें आते हैं। धार का खलघाट, बड़वानी और अलीराजपुर के घाट भी सूची में शामिल किए गए हैं।

भाजपा सीटों पर 35% घाट

नर्मदा प्रवाह क्षेत्र के 16 जिलों में करीब 35 प्रतिशत घाट भाजपा विधायकों के इलाकों में आते हैं। सीहोर, नर्मदापुरम, देवास और खंडवा में भी भाजपा का ही कब्जा है। ऐसे में यदि योजना पूरी तरह लागू होती है तो भाजपा विधायकों को अपनी निधि का बड़ा हिस्सा खर्च करना होगा। कांग्रेस विधायकों पर भी इसका सीधा असर पड़ेगा।

आदर्श घाट योजना क्या है

नर्मदा घाटों की बदलेगी सूरत: जानकारी के अनुसार इस योजना का नाम विधायक आदर्श घाट योजना हो सकता है। इसमें घाटों का जीर्णोद्धार और साफ-सफाई का काम शामिल रहेगा। घाटों के विकास पर भी खास काम होगा। इस काम में नर्मदा घाटी विकास विभाग, नगरीय प्रशासन और पंचायत विभाग मिलकर काम करेंगे। तीनों विभागों की भूमिका जल्द तय की जाएगी।

घाटों पर क्या-क्या बनेगा

नर्मदा घाटों की बदलेगी सूरत: चुने गए घाटों को आदर्श घाट घोषित किया जाएगा। इन्हें सिर्फ इको फ्रेंडली धार्मिक पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा। हर घाट पर सर्वसुविधायुक्त योग और ध्यान केंद्र बनाया जाएगा। घाटों के आसपास हरे-भरे पार्क भी तैयार होंगे। इससे श्रद्धालुओं को शांति से पूजा-पाठ करने की अच्छी जगह मिलेगी।

प्लास्टिक पर रहेगी पूरी रोक

नर्मदा घाटों की बदलेगी सूरत: इन घाटों के आसपास सिंगल यूज प्लास्टिक पूरी तरह बैन रहेगा। सरकार का मकसद नर्मदा नदी को साफ और प्रदूषण मुक्त रखना है। सिंहस्थ 2028 से पहले यह कदम काफी अहम माना जा रहा है। अगर योजना सही तरीके से लागू हुई तो नर्मदा किनारे की पूरी तस्वीर बदल सकती है।

योजना का असर और चुनौती

योजना लागू होने के बाद विधायकों के काम करने के तरीके में बड़ा बदलाव आएगा। जिन विधायकों के पास पहले से सीमित निधि है, उनके लिए यह एक चुनौती हो सकती है। हालांकि सरकार का मानना है कि इससे घाटों की स्थिति में लंबे समय तक सुधार बना रहेगा। आने वाले महीनों में योजना का पूरा खाका सामने आ सकता है।

क्यों जीवनदायिनी है नर्मदा

मध्य प्रदेश में नर्मदा नदी को जीवनदायिनी नदी माना जाता है। यह प्रदेश के कई जिलों में पीने के पानी और खेती दोनों के लिए बड़ा सहारा है। नदी किनारे बसे शहरों और गांवों की आस्था भी इससे गहरी जुड़ी है। इसी वजह से नर्मदा के घाटों की साफ-सफाई सिर्फ सिंहस्थ तक सीमित नहीं रहेगी। सरकार चाहती है कि यह व्यवस्था आगे भी लगातार बनी रहे।

जवाबदेही बढ़ाने वाला कदम

विधायक निधि का इस्तेमाल आमतौर पर सड़क, स्कूल और छोटे विकास कार्यों में होता है। पहली बार इतने बड़े स्तर पर इसे नदी सफाई से जोड़ा जा रहा है। इससे विधायकों की जिम्मेदारी सीधे जनता के सामने साफ नजर आएगी। अगर उनके इलाके का घाट गंदा रहा तो सवाल भी उन्हीं से पूछे जाएंगे। इस तरह यह योजना जवाबदेही बढ़ाने वाला कदम भी मानी जा रही है।

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