मध्य प्रदेश के दतिया जिले में स्थित पीतांबरा पीठ विश्व प्रसिद्ध मंदिर है। यहां नवरात्रि के दौरान देश भर से लाखों श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं। इस मंदिर में दस महाविद्याओं में से दो मुख्य देवियां विराजमान हैं।
पहली मां बगलामुखी हैं और दूसरी मां धूमावती देवी की पूजा होती है। मान्यता है कि यहां दर्शन मात्र से भक्तों के सारे दुख दूर होते हैं। विशेषकर राजनेता यहां उच्च पद की प्राप्ति के लिए पूजा करवाने आते हैं।
राजसत्ता की देवी मां बगलामुखी

मां बगलामुखी को पीतांबरा पीठ में सत्ता की देवी माना जाता है। उनकी पूजा का फल शत्रुओं पर विजय और सफलता प्रदान करता है। यही कारण है कि यहां हमेशा राजनेताओं का भारी जमावड़ा रहता है। चुनाव के समय यहां बड़े-बड़े नेता गुप्त अनुष्ठान और जप करवाते हैं। यहां होने वाला गुप्त अनुष्ठान और हवन अचूक फलदायी माना जाता है।
राजनीति में विजय, पद-प्रतिष्ठा की प्राप्ति और कठिन समय में शत्रुओं पर जीत हासिल करने के लिए यहां विशेष तंत्र-मंत्र किए जाते हैं। यहां की ऊर्जा इतनी प्रबल है कि लोग अपनी मनोकामना पूर्ण होने के अटूट विश्वास के साथ यहां पहुंचते हैं।
पीतांबरा पीठ का इतिहास

इस पवित्र सिद्ध शक्तिपीठ की स्थापना वर्ष 1935 में की गई थी। इसे परम पूज्य स्वामीजी महाराज ने अपने तपोबल से स्थापित किया था। स्वामीजी महाराज एक महान तपस्वी और सिद्ध पुरुष माने जाते थे। उनके मार्गदर्शन में ही इस स्थान को तंत्र साधना का केंद्र बनाया गया। यहां मां बगलामुखी की मूर्ति बहुत ही भव्य और प्रभावशाली दिखती है। मंदिर परिसर में मां धूमावती का भी एक प्राचीन मंदिर स्थित है।
शत्रुओं का नाश करने वाली मां

पौराणिक कथाओं के मुताबिक, मां बगलामुखी की शक्ति अद्भुत और अजेय है। वे अपने भक्तों के शत्रुओं की बुद्धि को स्तंभित कर देती हैं। युद्ध या संकट के समय इस शक्ति की उपासना बहुत फलदायी होती है। 1962 के युद्ध के दौरान भी यहां विशेष यज्ञ किया गया था। कहा जाता है कि उस यज्ञ से भारत को बहुत शक्ति मिली थी। भक्त यहां अपनी मनोकामना पूरी करने के लिए कड़े नियम पालते हैं।
नवरात्रि में साधना और अनुष्ठान का विशेष महत्व
नवरात्रि में यहां साधना का माहौल बहुत ही दिव्य होता है। श्रद्धालु लगातार नौ दिनों तक मंदिर परिसर में मंत्र जाप करते हैं। यहां पीले वस्त्र पहनकर मां की विशेष पूजा की जाती है। मां को पीला रंग बहुत प्रिय है, इसलिए इसे पीतांबरा कहते हैं। यहां की आरती और श्रृंगार भक्तों का मन पूरी तरह मोह लेता है। मंदिर में शांति और सकारात्मक ऊर्जा का गहरा अनुभव होता है।
मां धूमावती की दर्शन से मिलते हैं कष्टों से मुक्ति
पीतांबरा पीठ में मां धूमावती का मंदिर भी बहुत प्रसिद्ध है। मां धूमावती को दस महाविद्याओं में उग्र शक्ति माना जाता है। उनके दर्शन के लिए शनिवार का दिन बहुत विशेष माना गया है। सुहागिन महिलाएं आमतौर पर उनके दर्शन दूर से ही करती हैं। मां धूमावती भक्तों के सारे पाप और दरिद्रता को हर लेती हैं। दतिया का यह मंदिर सचमुच आध्यात्मिक शक्तियों का बड़ा भंडार है।
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