Panchayatan Temple: मध्य प्रदेश के प्रसिद्ध धार्मिक स्थल ओंकारेश्वर में जल्द ही एक नया इतिहास रचने जा रहा है। यहां के पवित्र मांधाता पर्वत पर एकात्म धाम का निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है। ये स्थल भारतीय सनातन ज्ञान परंपरा, आध्यात्मिक चेतना और सांस्कृतिक एकता का बड़ा केंद्र बनेगा।
हाल ही में मध्यप्रदेश के सीएम डॉ. मोहन यादव ने 45 शिलाओं की पूजा करके यहां पंचायतन मंदिर के निर्माण का शिलान्यास किया। उन्होंने कहा कि ओंकारेश्वर की इस पावन भूमि से पूरी दुनिया को सनातन दर्शन और समन्वय का संदेश मिलेगा।
आगामी उज्जैन सिंहस्थ 2028 महाकुंभ से पहले इस भव्य प्रोजेक्ट को पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके साथ ही देश और दुनिया में सनातन संदेश फैलाने के लिए एक विशाल यात्रा भी निकाली जाएगी। आइए जानें ओंकारेश्वर में बनने वाले इस एकात्म धाम और पंचायतन मंदिर के बारे में।
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ओंकारेश्वर में पंचायतन मंदिर की नींव
सिंहस्थ 2028: मध्य प्रदेश के ओंकारेश्वर में बड़ा धार्मिक काम शुरू हुआ है। मांधाता पर्वत पर भव्य एकात्म धाम का निर्माण कार्य चल रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने पूजन करके इसकी शुरुआत की। उन्होंने 45 पवित्र शिलाओं की पूजा करके मंदिर की आधारशिला रखी। यह धाम सनातन ज्ञान परंपरा का नया केंद्र बनेगा। यहां आने वाली पीढ़ियों को अच्छे संस्कार और सद्भाव का संदेश मिलेगा।
क्या है अनोखा पंचायतन दर्शन
सिंहस्थ 2028: पंचायतन मंदिर की संरचना बहुत खास और अर्थपूर्ण होगी। इसके केंद्र में मुख्य देवालय के रूप में भगवान शिव विराजेंगे। चारों दिशाओं में चार अलग-अलग उप-देवालय बनाए जाएंगे।
इनमें भगवान विष्णु, सूर्यदेव, भगवान गणेश और भगवती शक्ति की स्थापना होगी। अलग-अलग रूपों में एक ही ईश्वर की पूजा इसका मूल भाव है। आदि शंकराचार्य ने इस समन्वयकारी परंपरा को शुरू किया था।
ये मंदिर केवल एक पूजा स्थल नहीं होगा। इसकी अनूठी बनावट ही लोगों को एकात्म दर्शन का पाठ पढ़ाएगी। आदि गुरु शंकराचार्य ने जिस पंचायतन पूजा परंपरा की शुरुआत की थी, उसे इस मंदिर के जरिए फिर से जीवंत किया जा रहा है।
प्राचीन नागर स्थापत्य शैली में निर्माण
सिंहस्थ 2028: इस भव्य मंदिर को प्राचीन नागर स्थापत्य शैली में बनाया जा रहा है। इसका आधार 16 फीट ऊंचा होगा। मंदिर में प्रवेश के लिए चारों दिशाओं में द्वार होंगे।
इसका मुख्य शिखर सोमतिलक शैली में शानदार तरीके से तैयार होगा। गर्भगृह का निर्माण सर्वतोभद्र शैली की तर्ज पर किया जाएगा। यह देखने में बेहद सुंदर और भव्य नजर आएगा।
मंदिर निर्माण में 80 हजार घन फीट गुलाबी बलुआ पत्थर लगेगा। इन पत्थरों पर बहुत ही सुंदर नक्काशी की जाएगी। पूरे मंदिर परिसर में 100 कलात्मक स्तंभ बनाए जाएंगे।
इसके अलावा मंदिर के ऊपर 121 सुंदर कलश स्थापित किए जाएंगे। मुख्य मंडप में 26 फीट व्यास का विशाल गुंबद होगा। यह गुंबद कलात्मक कारीगरी का एक बेहतरीन नमूना पेश करेगा।
सिंहस्थ 2028 से पहले पूरा होगा काम
सरकार ने इस प्रोजेक्ट को पूरा करने की समय सीमा तय की है। सिंहस्थ 2028 से पहले मंदिर पूरी तरह तैयार हो जाएगा। ओंकारेश्वर में नए घाट और सुविधाएं भी विकसित की जा रही हैं।
इससे यहां आने वाले श्रद्धालुओं को बहुत आसानी होगी। यह स्थल आदि गुरु शंकराचार्य की ज्ञान साधना से जुड़ा रहा है। इसलिए इसका धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व बहुत अधिक है।
सीएम ने एक बड़ी सांस्कृतिक यात्रा का भी ऐलान किया है। सिंहस्थ महाकुंभ से पहले भव्य एकात्म यात्रा शुरू की जाएगी। यह यात्रा पूरे देश और दुनिया में सनातन संदेश पहुंचाएगी।
संत परंपरा और एकात्म दर्शन का प्रचार इस यात्रा का मुख्य मकसद होगा। इस यात्रा का समापन सिंहस्थ के दौरान ओंकारेश्वर में ही होगा। यह यात्रा सभी लोगों को आपस में जोड़ने का काम करेगी।
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