ujjainsimhastha

महाकाल की आरती, जय शिव जय महाकाल से दूर होंगे सारे संकट

महाकाल की आरती
Spread the love

महाकाल की आरती: उज्जैन के राजा भगवान महाकालेश्वर का स्वरूप निराला है। वे मृत्यु के अधिपति हैं, इसलिए उन्हें ‘कालों का काल’ कहा जाता है। मान्यता है कि जो भक्त महाकाल की शरण में आ जाता है, उसका काल (मृत्यु) भी कुछ नहीं बिगाड़ सकता। “अकाल मृत्यु वो मरे जो काम करे चंडाल का, काल उसका क्या करे जो भक्त हो महाकाल का”—यह पंक्ति उनकी शक्ति का प्रमाण है।

गूगल पर उज्जैन सिंहस्थ चुनें ! Add as a preferred source on Google

बाबा की नियमित पूजा और आरती करने से मन को असीम शांति मिलती है। उनकी भस्म आरती और संध्या आरती के समय डमरू, शंख और नगाड़ों की गूँज भक्तों के रोम-रोम में शिवत्व जगा देती है। महाकाल की आरती का पाठ करने से दरिद्रता, रोग और अकाल मृत्यु का भय हमेशा के लिए समाप्त हो जाता है।

महाकाल की आरती

ऊं जय शिव जय महाकाल
स्वामी जय शंभू महाकाल,
ज्योतिर्लिंग स्वरूपा
ज्योतिर्लिंग स्वरूपा,
तुम कालो के काल
ओम जय शिव जय महाकाल।

बारह ज्योतिर्लिंग में
महिमा बड़ों है नाम,
क्षिप्रा तट उज्जैन में,
महाकाल को धाम
ऊं जय शिव जय महाकाल।

प्रभु तुम भीमेश्वर देवा
तुम काशी विश्वनाथ,
गोमती तट त्रयंभकेश्वर
दारूकवन नागनाथ,
ओम जय शिव जय महाकाल।

हाथ जोड़ तेरे द्वारे
काल खड़ा लाचार,
सुर नर असुर चराचर,
सब के हो करतार,
ऊं जय शिव जय महाकाल।

चिता भस्म से तेरो
नित नित हो शृंगार,
भक्तन का मन मोहे,
तेरो रूप निहार,
ऊं जय शिव जय महाकाल।

भस्म आरती तेरी
अद्भुत है भगवान,
भाग्यवान नर नारी,
पाएं शुभ दर्शन
ऊं जय शिव जय महाकाल।

साथ में गणपति गौरा,
कार्तिक है देवा,
द्वार खड़े हैं नंदी,
नित्य उठ करें सेवा,
ऊं जय शिव जय महाकाल।

जो जन तेरा दर्शन
श्रद्धा से कर जाए,
मौत अकाल ना आए,
सुख वैभव पा जाए
ऊं जय शिव जय महाकाल।

महाकाल की आरती
जो नर नारी गाए,
कहत महेश प्रभु से,
मन इच्छा फल पाए
ऊं जय शिव जय महाकाल।

ऊं जय शिव जय महाकाल
स्वामी जय शंभू महाकाल,
ज्योतिर्लिंग स्वरूपा,
ज्योतिर्लिंग स्वरूपा,
तुम कालो के काल,
ऊं जय शिव जय महाकाल।।

भगवान महाकालेश्वर की महिमा

  • काल पर विजय: दक्षिणमुखी महाकाल न केवल मृत्यु के देवता यमराज की दिशा को नियंत्रित करते हैं, बल्कि अपने भक्तों को अकाल मृत्यु के भय से भी मुक्त करते हैं।
  • मोक्ष का द्वार: उज्जैन की इस पावन धरा पर बाबा की पांचों समय की आरती में शामिल होना, आत्मा को जन्म-मरण के बंधन से मुक्त कर मोक्ष की ओर ले जाता है।
  • अद्भुत परंपरा: भस्म आरती से लेकर शयन आरती तक का दिव्य क्रम यह सिखाता है कि जीवन नश्वर है और अंत में महादेव की शरण ही एकमात्र सत्य है।
  • आध्यात्मिक ऊर्जा: मंदिर में होने वाली डमरू और शंख की गूंज भक्तों के भीतर सकारात्मक ऊर्जा भर देती है, जिससे मानसिक तनाव और रोगों का नाश होता है।
  • अटूट विश्वास: संक्षेप में, राजा महाकाल की भक्ति ही वह ‘महामंत्र’ है, जो कठिन से कठिन संकट को भी टालने की शक्ति रखती है और जीवन को कृतार्थ करती है।

डिस्क्लेमर: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी पूरी तरह से सही या सटीक होने का हम कोई दावा नहीं करते हैं। ज्यादा और सही डिटेल्स के लिए, हमेशा उस फील्ड के एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें।

ये खबरें भी पढ़ें….

क्या है उज्जैन महाकाल की भस्म आरती का आध्यात्मिक और वैज्ञानिक महत्व

Scroll to Top