समझें क्या है पूरा मामला…
- सिंहस्थ 2028 से पहले मालवा में जुड़ेंगे 2500 नए होटल कमरे।
- इंदौर उज्जैन ओंकारेश्वर में होटल कारोबार को मिली नई रफ्तार।
- धार्मिक पर्यटन से मध्य प्रदेश के हॉस्पिटैलिटी बाजार में उछाल।
- सिंहस्थ से पहले उज्जैन में सड़क-घाट, पानी की सुविधाएं बढ़ीं।
- अयोध्या वाराणसी जैसा ट्रेंड अब मध्य प्रदेश में भी दिखा।
मध्य प्रदेश में धार्मिक पर्यटन तेजी से बढ़ रहा है। इसका सीधा असर राज्य के होटल कारोबार पर दिख रहा है। सिंहस्थ 2028 से पहले मालवा क्षेत्र में 2500 से ज्यादा नए कमरे जुड़ेंगे। यह विस्तार इंदौर, उज्जैन, ओंकारेश्वर और कालाकुंड में हो रहा है। बेहतर कनेक्टिविटी और इंफ्रास्ट्रक्चर इस निवेश की बड़ी वजह हैं।
मालवा में तेज हुआ निवेश
भारत में धार्मिक पर्यटन का कारोबार लगातार बढ़ रहा है। इसका असर अब मध्य प्रदेश की हॉस्पिटैलिटी इंडस्ट्री पर साफ दिखने लगा है।
सिंहस्थ 2028 से पहले मालवा क्षेत्र में तीन, चार और पांच सितारा श्रेणी के 2500 से ज्यादा नए होटल कमरे जुड़ने की उम्मीद है। यह पूरा विस्तार इंदौर, उज्जैन, ओंकारेश्वर और कालाकुंड में केंद्रित है।
बेहतर कनेक्टिविटी, धार्मिक पर्यटन ( Religious tourism ) प्रोजेक्ट और इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास इस निवेश की मुख्य वजह बताए जा रहे हैं। उद्योग जगत के अनुमानों के अनुसार मध्य प्रदेश में फिलहाल सभी श्रेणियों में 50,000 से ज्यादा होटल कमरे मौजूद हैं।
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उज्जैन बना निवेश का केंद्र
होटल एंड रेस्टोरेंट एसोसिएशन ऑफ वेस्टर्न इंडिया की मध्य प्रदेश समिति के अध्यक्ष सुमित सूरी ने बताया कि सिंहस्थ से पहले मालवा क्षेत्र में 2500 से ज्यादा कमरे जुड़ेंगे। उन्होंने कहा कि यह विस्तार खासतौर पर इंदौर, उज्जैन, ओंकारेश्वर और कालाकुंड में होगा।
उज्जैन इस पूरे निवेश का सबसे बड़ा ट्रिगर बना हुआ है। यहां सड़क, पुल, घाट, पानी की सप्लाई, सैनिटेशन और परिवहन जैसी बुनियादी सुविधाओं पर तेजी से काम हो रहा है। यह सारा काम सिंहस्थ को ध्यान में रखकर किया जा रहा है।
इंदौर, उज्जैन, ओंकारेश्वर और महेश्वर के बीच बेहतर सड़क कनेक्टिविटी पर भी काम चल रहा है। इससे मल्टी-डेस्टिनेशन ट्रैवल को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। यानी श्रद्धालु एक ही यात्रा में कई धार्मिक स्थलों तक पहुंच सकेंगे।
नर्मदा बेल्ट में भी दिख रहा असर
ओंकारेश्वर और महेश्वर को मिलाकर बना नर्मदा बेल्ट भी अब एक नया हॉस्पिटैलिटी कॉरिडोर बनकर उभर रहा है। नर्मदा परिक्रमा मार्ग पर मांग बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है।
इससे इस इलाके में भी होटल निवेश को बढ़ावा मिल सकता है। धार्मिक पर्यटन से जुड़े कारोबारी इस क्षेत्र को लेकर आशान्वित दिख रहे हैं।
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भोपाल में भी बढ़ी होटल मांग
राजधानी भोपाल में भी होटल निवेश बढ़ता दिख रहा है। यहां पर्यटकों की आवाजाही बढ़ने से नई हॉस्पिटैलिटी परियोजनाएं आकर्षित हो रही हैं।
भोपाल अब आसपास के धार्मिक स्थलों तक पहुंचने का एक बड़ा गेटवे बनता जा रहा है। हनुमान लोक, देवी लोक और पशुपतिनाथ लोक जैसे धार्मिक पर्यटन प्रोजेक्ट भी इसमें अहम भूमिका निभा रहे हैं।
इसके अलावा चित्रकूट, मैहर और अमरकंटक के आसपास भी विकास कार्य हो रहे हैं। इससे राज्य के अन्य हिस्सों में भी होटल मांग बढ़ने की उम्मीद है।
अयोध्या-वाराणसी जैसा ट्रेंड
मध्य प्रदेश में दिख रहा यह ट्रेंड अयोध्या और वाराणसी से मिलता-जुलता है। वहां बेहतर कनेक्टिविटी और इंफ्रास्ट्रक्चर ने होटल और पर्यटन से जुड़े निवेश को रफ्तार दी थी। अब मालवा और नर्मदा बेल्ट में भी वैसा ही निवेश चक्र शुरू होता दिख रहा है। सिंहस्थ 2028 इस पूरे बदलाव का सबसे बड़ा कारण माना जा रहा है।
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