सिंहस्थ 2028: उज्जैन में होने वाले सिंहस्थ 2028 को लेकर सरकार पूरी तरह एक्शन मोड में है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने तैयारियों की समीक्षा के लिए बड़ी बैठक की। उन्होंने अधिकारियों को सभी काम दीपावली 2027 तक पूरे करने का आदेश दिया है।
सिंहस्थ की भव्यता और सुरक्षा के लिए कई बड़े प्रोजेक्ट्स को हरी झंडी मिली है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया है कि काम में देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। जो विभाग पिछड़ेंगे, उनके जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की गाज गिर सकती है। सरकार का लक्ष्य श्रद्धालुओं को विश्वस्तरीय सुविधाएं और सुरक्षा प्रदान करना है।
प्रयागराज की तर्ज पर हाई-टेक कमांड सेंटर
सिंहस्थ 2028 मेले की निगरानी के लिए एक विशाल कमांड सेंटर बनाया जाएगा। इस पर लगभग 139.14 करोड़ रुपए का भारी खर्च किया जाएगा। यह सेंटर प्रयागराज कुंभ के कंट्रोल रूम की तर्ज पर काम करेगा। मेले की हर गतिविधि पर यहा से रियल टाइम नजर रखी जाएगी।
यह आधुनिक सेंटर एआई (AI) और डेटा एनालिटिक्स तकनीक से लैस होगा। यहां से सीसीटीवी कैमरों और ड्रोन के जरिए निगरानी की जाएगी। एआई तकनीक की मदद से भीड़ प्रबंधन को बहुत आसान बनाया जाएगा। मोबाइल ऐप के जरिए श्रद्धालुओं को रास्तों और सुविधाओं की जानकारी मिलेगी।
22 बड़े विकास कार्यों को मंजूरी
सिंहस्थ 2028: बैठक में विकास कार्यों के लिए 2923.84 करोड़ रुपए मंजूर किए गए। इसके तहत कुल 22 बड़े प्रोजेक्ट्स उज्जैन में पूरे किए जाएंगे। इसमें नई सड़कें, पुल, घाट और सुंदर पार्कों का निर्माण शामिल है। ड्रेनेज सिस्टम और स्वच्छता पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
मेला क्षेत्र में स्थाई निर्माणों को भी सरकार ने मंजूरी दे दी है। श्रद्धालुओं के ठहरने और घूमने के लिए नए सर्किट हाउस बनेंगे। उज्जैन रेलवे स्टेशन से बस स्टैंड तक स्काईवॉक का निर्माण होगा। इससे यात्रियों को आने-जाने में बहुत ज्यादा सुविधा और आसानी होगी।
आधुनिक परिवहन और सुरक्षा पर जोर
उज्जैन में मल्टी मॉडल ट्रांजिट हब बनाने का भी बड़ा फैसला हुआ है। देवास गेट बस स्टैंड को आधुनिक हब के रूप में विकसित करेंगे। स्काईवॉक उज्जैन के मुख्य जंक्शनों को आपस में जोड़ने का काम करेगा। इससे शहर के अंदर यातायात का दबाव काफी हद तक कम होगा।
कमांड सेंटर साइबर सुरक्षा और कचरा प्रबंधन पर भी नजर रखेगा। जल आपूर्ति और सफाई व्यवस्था की निगरानी भी डिजिटल माध्यम से होगी। सुरक्षा के लिहाज से ड्रोन तकनीक का व्यापक स्तर पर उपयोग होगा। सरकार का प्रयास है कि सिंहस्थ 2028 ऐतिहासिक और सुरक्षित बने।
ये खबर भी पढ़ें…
एमपी में खुद हनुमान जी करते हैं इंसाफ, जिला अदालत से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक लगती हैं अर्जियां

