मां कंकाली मंदिर: मध्य प्रदेश के रायसेन जिले में एक दिव्य शक्तिपीठ स्थित है। ये मंदिर भोजपुर विधानसभा के ग्राम गुदावल में बना है। मां कंकाली का यह दरबार करीब 250 साल पुराना है। मान्यता के मुताबिक, यहां आने वाले हर भक्त की मनोकामना पूरी होती है।
नवरात्रि के पावन पर्व पर यहां भक्तों का तांता लगता है। मंदिर की महिमा दूर-दूर तक फैली हुई है। लोग यहां अपनी आस्था लेकर मीलों पैदल चलकर आते हैं। माता रानी अपने भक्तों को कभी खाली हाथ नहीं भेजती हैं। आइए जानें मध्य प्रदेश के इस मंदिर का रहस्य
111 साल से जल रही अखंड ज्योति का रहस्य

मां कंकाली मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यहां की अखंड ज्योति है। मान्यता के मुताबिक, ये ज्योति पिछले 111 सालों से लगातार जल रही है। मंदिर के पुजारी इसकी देखभाल बहुत निष्ठा से करते हैं। भक्तों का मानना है कि यह ज्योति कभी नहीं बुझती।
इसके दर्शन मात्र से मन को असीम शांति मिलती है। यह ज्योति मां की शक्ति का जीवंत प्रमाण है। नवरात्रि में इस ज्योति का महत्व और भी बढ़ जाता है। श्रद्धालु यहां घी और तेल का दान पुण्य करते हैं।
दशहरे पर गर्दन सीधी होने का चमत्कार
मां कंकाली की मूर्ति की गर्दन हमेशा झुकी रहती है। लेकिन मान्यता के मुताबिक, दशहरे के दिन एक अद्भुत चमत्कार होता है। हवन के बाद कुछ क्षण के लिए गर्दन सीधी हो जाती है। इस दृश्य को देखना बड़े सौभाग्य की बात मानी जाती है। कहा जाता है कि इससे सारे शारीरिक कष्ट दूर होते हैं। विज्ञान भी इस रहस्य को आज तक समझ नहीं पाया है।
मां कंकाली मंदिर की स्थापना की कहानी

मंदिर की स्थापना की कहानी बहुत ही दिलचस्प है। सन 1731 में पटेल हरलाल मीणा को सपना आया था। मां ने उन्हें मूर्ति निकालकर स्थापित करने का आदेश दिया। खुदाई के दौरान मां कंकाली की दिव्य मूर्ति निकली थी।
साथ ही ब्रह्मा, विष्णु और महेश की मूर्तियां भी मिलीं। हरलाल मीणा ने श्रद्धापूर्वक सभी को यहां विराजमान किया। तब से यह स्थान सिद्ध शक्तिपीठ बन गया है। आज भी मीणा परिवार मंदिर की सेवा में लगा है।
जब चोरों की आंखों की चली गई थी रोशनी
मां कंकाली मंदिर से जुड़ा एक और किस्सा बहुत प्रसिद्ध है। एक बार कुछ चोरों ने यहां चोरी करने की कोशिश की। मंदिर का सामान ले जाते ही उनकी रोशनी चली गई। वे मंदिर परिसर से बाहर भी नहीं निकल पाए थे। बाद में उन्होंने मां के चरणों में गिरकर माफी मांगी। माफी मांगने के बाद उनकी आंखों की रोशनी वापस आई। इस घटना के बाद लोगों की आस्था और बढ़ गई।
मन्नत पूरी होने की मान्यता

पुजारी बताते हैं कि यहां निसंतान महिलाओं की गोद भरती है। माता रानी का आशीर्वाद पाकर लोग बहुत खुश होते हैं। लोग अपने बिगड़े कामों के लिए यहां हाजिरी लगाते हैं। मन्नत पूरी होने पर भक्त मां का धन्यवाद करते हैं। वे यहां चांदी के छत्र और चुनरी चढ़ाते हैं। भोपाल और अन्य शहरों से भी भारी भीड़ उमड़ती है। भक्तों का कहना है कि मांं सब कुछ जानती हैं। सच्चे दिल से मांगी हर मुराद यहां पूरी होती है।
नवरात्रि में विशेष तैयारियां
नवरात्रि के दौरान इस मंदिर को फूलों से सजाया जाता है। सुबह और शाम को विशेष महाआरती का आयोजन होता है। प्रशासन भी सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करता है। मंदिर के आसपास विशाल मेला भी आयोजित किया जाता है।
स्थानीय ग्रामीण इसे अपने गौरव का प्रतीक मानते हैं। यहां आने वाला हर व्यक्ति एक नई ऊर्जा पाता है। मां कंकाली सबका कल्याण करने वाली करुणामयी माता हैं। इस बार भी लाखों श्रद्धालुओं के आने की उम्मीद है।
डिस्क्लेमर: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी पूरी तरह से सही या सटीक होने का हम कोई दावा नहीं करते हैं। ज्यादा और सही डिटेल्स के लिए, हमेशा उस फील्ड के एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें।
ये खबर भी पढ़ें..
क्यों खास है उज्जैन शिप्रा तट की संध्या महाआरती, जानें आरती में शामिल होने के फायदे

