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क्या है एमपी के मां हिंगलाज मंदिर का रहस्य, यहां पूरी होती है भक्तों की हर मनोकामना

मां हिंगलाज मंदिर
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मां हिंगलाज मंदिर: चैत्र नवरात्रि 2026 के पावन अवसर पर भक्तों की भीड़ शक्तिपीठों की ओर उमड़ रही है। मध्यप्रदेश के रायसेन जिले की बाड़ी तहसील में एक दिव्य मंदिर स्थित है। ये मंदिर मां हिंगलाज को समर्पित है जो भारत में अपनी तरह का इकलौता है। भोपाल से इस सिद्ध स्थान की दूरी मात्र 100 किलोमीटर की है।

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पौराणिक कथाओं के मुताबिक बलूचिस्तान में माता सती का पावन शीश गिरा था। वह स्थान मुख्य शक्तिपीठ है जहां आज भी श्रद्धालुओं की अटूट श्रद्धा जुड़ी है। रायसेन के बाड़ी में स्थित ये मंदिर 500 साल पुराना माना जाता है। इसे बलूचिस्तान के मुख्य मंदिर की उपशक्तिपीठ के रूप में पूजा जाता है।

बलूचिस्तान से रायसेन तक की कठिन पदयात्रा


मां हिंगलाज मंदिर की स्थापना की कहानी बहुत ही प्रेरणादायक है। 16वीं सदी में खाकी अखाड़े के महंत भगवानदास महाराज बलूचिस्तान की यात्रा पर गए थे। उन्होंने दो साल तक अत्यंत कठिन और दुर्गम रास्तों पर पदयात्रा की थी। वे गंभीर बीमारी से पीड़ित थे फिर भी माता के दर्शन की लालसा रही।

महंत जी बलूचिस्तान के मूल मंदिर से दो अखंड ज्योतियां लेकर आए थे। उन्होंने कंदमूल खाकर अपनी इस आध्यात्मिक यात्रा को पूरी श्रद्धा से निभाया था। यही ज्योतियां आज भी रायसेन के इस पावन मंदिर में प्रज्वलित रहती हैं। इन ज्योतियों के दर्शन मात्र से भक्तों के सारे कष्ट दूर हो जाते हैं।

माता के चमत्कार की ऐतिहासिक कथा


मां हिंगलाज की महिमा से भोपाल की पहली महिला शासक भी प्रभावित हुई थीं। 1820 के आसपास बेगम कुदसिया ने मंदिर की आरती पर रोक लगा दी थी। बेगम आरती के शोर से नाराज थीं और शांति चाहती थीं। मंदिर के महंत ने माता की सेवा रोकने से साफ मना कर दिया।

बेगम ने माता की परीक्षा लेने के लिए मांस का थाल भेजा था। जैसे ही वह थाल मंदिर पहुंचा वह चमत्कारिक रूप से मिठाई बन गया। यह देख बेगम कुदसिया दंग रह गईं और उन्होंने तुरंत माफी मांगी। उन्होंने श्रद्धापूर्वक मंदिर को विशाल जागीर और जमीन दान में दे दी।

वर्तमान में मंदिर की व्यवस्था


आज मां हिंगलाज मंदिर का संचालन एक विशेष ट्रस्ट समिति द्वारा किया जा रहा है। यहां की पाठशाला में बच्चे वेदों और कर्मकांडों का गहन अध्ययन करते हैं। मंदिर परिसर के पास 65 एकड़ का बहुत बड़ा सुंदर बगीचा भी है।

नवरात्रि में यहां का वातावरण बहुत ही आध्यात्मिक और दिव्य हो जाता है। हिंगलाज माता का यह मंदिर सांस्कृतिक एकता का भी एक बड़ा प्रतीक है। यह स्थान हिंदू और मुस्लिम समुदायों के बीच आपसी सम्मान का केंद्र है। नवरात्रि में यहां लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं। मां के दरबार में सच्चे मन से मांगी हर मुराद पूरी होती है।

डिस्क्लेमर: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी पूरी तरह से सही या सटीक होने का हम कोई दावा नहीं करते हैं। ज्यादा और सही डिटेल्स के लिए, हमेशा उस फील्ड के एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें।

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